हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी में एक शातिर गिरोह ने सरकारी विभाग में गाड़ियां लगाने का झांसा देकर लोगों से बड़ी ठगी की है। जिला कांगड़ा के ज्वालामुखी उपमंडल के नीरज कुमार शर्मा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि अप्रैल 2024 में उनकी मुलाकात पूर्व सहयोगी प्रमोद कुमार के माध्यम से रत्नेश्वर सिंह से हुई। रत्नेश्वर ने खुद को सरकारी संपर्कों वाला रसूखदार व्यक्ति बताया। हर माह 15 हजार की आमदनी उसने दावा किया कि वह नीरज की कार किसी विभाग में किराए पर लगवा देगा। इससे नीरज को हर महीने 15 हजार रुपए की आमदनी होगी। शुरुआत में नीरज ने इनकार किया, लेकिन लगातार झूठे आश्वासन और लालच में फंसकर उन्होंने अपने दस्तावेज दे दिए। रत्नेश्वर ने नीरज के नाम पर एक नई गाड़ी फाइनेंस करवाई और उसे अपने कब्जे में ले लिया। 2025 के बाद से नहीं दी किस्तें जनवरी 2025 के बाद से रत्नेश्वर न तो गाड़ी की किस्तें चुका रहा है। न ही गाड़ी से होने वाली आमदनी में नीरज को कोई हिस्सा दे रहा है। अब तो वह संपर्क करने पर जवाब भी नहीं देता। जांच में सामने आया है कि जिन गाड़ियों को सरकारी काम के नाम पर लिया, उन्हें नशीले पदार्थों की तस्करी में इस्तेमाल किया जा रहा है। गाड़ियां चिट्टा तस्करी के लिए प्रयोग कुछ वाहनों की हालत पुष्टि करते हैं कि गाड़ियां चिट्टा तस्करी के लिए प्रयोग हो रही थी। नीरज को शक है कि कुछ गाड़ियां बिश्नोई गैंग तक पहुंचाई गई हो। यह गैंग देशभर में हथियारों और नशे के नेटवर्क के लिए कुख्यात है। पुलिस इस पहलू से भी जांच कर रही है। मामले ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आम लोग कब तक ऐसे संगठित गिरोहों का शिकार बनते रहेंगे। सरकारी विभाग में लगाने के नाम पर ली 100 गाड़ियां ज्वालामुखी। सरकारी विभाग में गाड़ी किराए पर लगाने का सपना दिखाकर ठगी और फिर उन्हीं गाड़ियों का नशे के धंधे में इस्तेमाल जिला कांगड़ा के ज्वालामुखी उपमंडल से सामने आए। चौंकाने वाले मामले ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोग कब तक संगठित गैंग का शिकार बनते रहेंगे। गाड़ी फाइनेंस करवाई, किस्तें भी नहीं दी शुरुआत में नीरज ने इनकार किया, लेकिन लगातार झूठे आश्वासन, दबाव और लालच में फंसकर उसने दस्तावेज दे दिए। रत्नेश्वर ने उसके नाम पर एक नई गाड़ी फाइनेंस करवाई और कब्जे में ले ली। जनवरी 2025 के बाद से रत्नेश्वर न तो किस्तें चुका रहा है और न ही गाड़ी से होने वाली आमदनी में नीरज को कोई हिस्सा दे रहा है। उल्टा, अब संपर्क करने पर जवाब देना भी बंद कर चुका है। अकेले नहीं था नीरज, कई लोग और भी फंसे नीरज ने जब इस धोखाधड़ी की पड़ताल की, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ, वह अकेला शिकार नहीं था। नीरज जैसे कई और लोग इस गैंग के झांसे में आ चुके हैं। सभी ने मिलकर पुलिस शिकायत दर्ज करवाई है। अब तक 28 वाहन पुलिस बरामद कर चुकी है, लेकिन नीरज की गाड़ी अब भी गायब है। बिश्नोई गैंग से जुड़ाव की आशंका नीरज को शक है कि कुछ गाड़ियां विश्नोई गैंग तक पहुंचाई गई हों। यह वही गैंग है, जो देशभर में हथियारों और नशे के नेटवर्क के लिए कुख्यात है। पुलिस इस एंगल से भी जांच में जुट गई है। नीरज कुमार का कहना है कि यह मामला उसकी जिंदगी में भूचाल की तरह आया। फाइनेंस की किश्तें उसके सिर पर हैं, गाड़ी गायब है, और अब बैंक भी दबाव बना रहा है। नीरज की तरह ही कई अन्य लोग भी भारी तनाव में हैं। पुलिस ने तेज की जांच पुलिस जिला देहरा के एसपी मयंक चौधरी ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और जांच की जा रही है कि इसमें कितने और लोग शामिल हैं। अब तक कई गाड़ियां बरामद की जा रही है और शेष की तलाश जारी है। एसपी मयंक चौधरी ने कहा कि गंभीरता से लेते हुए जांच की जा रही है।