हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में अब नेशनल हाईवे पर अवैध और अनधिकृत रूप से वाहन खड़े करने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। हाईवे को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए प्रशासन द्वारा एक व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की गई है। इस नई व्यवस्था के तहत हाईवे पर लावारिस या गलत तरीके से खड़े वाहनों को न सिर्फ क्रेन से उठाया जाएगा, बल्कि वाहन मालिकों पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। उपायुक्त (डीसी) ऊना जतिन लाल ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह एसओपी (SOP) माननीय सुप्रीम कोर्ट के 13 अप्रैल 2022 के आदेशों और ‘कंट्रोल ऑफ नेशनल हाईवे (लैंड एंड ट्रैफिक) अधिनियम, 2022’ के कानूनी प्रावधानों के तहत तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य नेशनल हाईवे को पूरी तरह से अवरोध मुक्त बनाना है ताकि सड़क हादसों में कमी लाई जा सके और आम जनता को बिना किसी रुकावट के आवागमन की सुविधा मिल सके। एसडीएम की अध्यक्षता में बनी टीमें, जीपीएस से रखी जाएगी नजर हाईवे पर अनधिकृत पार्किंग की निगरानी के लिए उपमंडल स्तर पर विशेष प्रवर्तन दल (Enforcement Teams) का गठन किया गया है। संबंधित क्षेत्र के एसडीएम (SDM) इस टीम के अध्यक्ष होंगे। टीम में एसडीपीओ, एनएचएआई (NHAI) हमीरपुर के परियोजना निदेशक, लोक निर्माण विभाग (NH) के अधिशासी अभियंता और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) को शामिल किया गया है। इस एसओपी के तहत पुलिस और सड़क एजेंसियों की गश्ती टीमें हाईवे का दौरा करेंगी और अवैध पार्किंग वाले स्थानों व वाहनों की जीपीएस (GPS) आधारित फोटोग्राफी करेंगी। इसके बाद वाहन मालिक को 7 दिनों का प्रारंभिक नोटिस दिया जाएगा। अगर तय समय में वाहन नहीं हटाया गया, तो प्रशासन क्रेन और भारी मशीनरी की मदद से उसे जब्त कर लेगा। नहीं कटेंगे मैनुअल चालान; हर 75 किमी पर तैनात रहेगी क्रेन डीसी जतिन लाल ने साफ किया कि हाईवे पर कानून तोड़ने वालों के खिलाफ पारदर्शिता बरतने के लिए मौके पर कोई भी मैनुअल चालान नहीं काटा जाएगा। सभी साक्ष्य ऑनलाइन भेजकर केवल ई-चालान (E-Challan) ही जारी किए जाएंगे। जिन क्षेत्रों में एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) चालू है, वहां कैमरों के जरिए सीधे उल्लंघनकर्ताओं की पहचान कर रिपोर्ट पुलिस को जाएगी। इसके अलावा, कार्रवाई को गति देने के लिए हाईवे के प्रत्येक 75 किलोमीटर के दायरे में रिकवरी क्रेन की उपलब्धता अनिवार्य की गई है। इस पूरी मुहिम की प्रगति की समीक्षा हर महीने ‘जिला हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स’ की बैठक में की जाएगी।