हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सबसे दुर्गम और कड़े भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्र ‘बड़ा भंगाल’ का एक विशेष और ऐतिहासिक दौरा किया। धौलाधार और पीर पंजाल पर्वतमालाओं के ऊंचे पहाड़ों के बीच बसे इस दूरदराज के क्षेत्र में पहुंचकर मुख्यमंत्री ने न केवल प्रशासनिक प्राथमिकताओं को परखा, बल्कि पूरी तरह से स्थानीय रंग में रंगे नजर आए। उन्होंने क्षेत्रवासियों के प्रति सम्मान जताते हुए वहां का पारंपरिक परिधान पहना और बेहद आत्मीयता से ग्रामीणों से मुलाकात की। ग्रामीणों से सीधा संवाद: ‘कतार के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचेगा विकास’ दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने बड़ा भंगाल के निवासियों से सीधे संवाद (जनसंवाद) स्थापित किया। उन्होंने पहाड़ों पर रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं, बुनियादी आवश्यकताओं और उनकी अपेक्षाओं को बारीकी से समझा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि हमारी सरकार का मुख्य संकल्प प्रदेश के हर दुर्गम और पिछड़े कोने तक विकास और बुनियादी सुविधाओं को पहुंचाना है। विकास की कतार में खड़े आखिरी व्यक्ति तक उसका हक पहुंचाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।” जमीन पर बैठकर सहभोज और अलाव के इर्द-गिर्द जीवन का संघर्ष मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल औपचारिक बैठकों या कागजी घोषणाओं तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने ग्रामीणों के साथ एक परिवार के सदस्य की भांति समय बिताया। रात के समय मुख्यमंत्री ने किसी वीआईपी तामझाम के बिना स्थानीय लोगों के साथ जमीन पर बैठकर सहभोज किया। पहाड़ों की कड़कड़ाती ठंड के बीच देर रात तक अलाव (आग) के चारों ओर बैठकर बातचीत का दौर चला, जहां ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के साथ अपने कठिन जीवन-संघर्ष की गाथाएं खुलकर साझा कीं। लोकनृत्य में थिरके मुख्यमंत्री, बताया जीवन का सबसे खूबसूरत पल हिमाचल की समृद्ध संस्कृति की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे गांव पारंपरिक उत्सवों के मुख्य केंद्र हैं। उन्होंने बड़ा भंगाल के अनूठे रात्रि उत्सव की जमकर सराहना की। मुख्यमंत्री इस उत्सव के केवल साक्षी ही नहीं बने, बल्कि जब स्थानीय लोकनृत्य शुरू हुआ, तो वे खुद को रोक नहीं पाए और ग्रामीणों के साथ कदम से कदम मिलाकर जमकर थिरके। दौरे के अंत में मुख्यमंत्री भावुक नजर आए और उन्होंने इस पूरी यात्रा को अपने जीवन के सबसे खूबसूरत और कभी न भूलने वाले पलों में से एक बताया।