चंबा जिले के भरमौर के ऐतिहासिक चौरासी मंदिर परिसर में लंगर और भंडारे के आयोजन के लिए प्रशासन ने पूर्व अनुमति की अनिवार्यता खत्म कर दी है। प्रशासन के इस फैसले से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है। यह कदम पूर्व में जारी आदेश की तीखी आलोचना और विरोध के बाद उठाया गया है। इससे पहले, नवरात्रि के दौरान प्रशासन ने एक एडवाइजरी जारी की थी। इसमें एक दिन के लंगर के लिए 1000 रुपए और दो दिन के लिए 2500 रुपए स्वच्छता शुल्क के रूप में देने का निर्देश दिया गया था। साथ ही, लंगर व भंडारे के आयोजन के लिए तीन दिन पूर्व प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य किया गया था। श्रद्धालुओं सामाजिक संगठनों में भारी नाराजगी प्रशासन के इस निर्णय को लेकर स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और विभिन्न धार्मिक व सामाजिक संगठनों में भारी नाराजगी देखी गई थी। इस आदेश का व्यापक स्तर पर विरोध किया जा रहा था।
विवाद के बाद स्पष्टीकरण जारी किया विवाद बढ़ने के बाद, प्रशासन ने मंगलवार दोपहर बाद अपना स्पष्टीकरण जारी किया। इसमें साफ किया गया कि अब लंगर व भंडारे के आयोजन के लिए किसी भी प्रकार की पहले अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वच्छता शुल्क को अनिवार्य शुल्क के बजाय साफ-सफाई के लिए ऐच्छिक सहयोग के रूप में देखा जाए। लोग बोले- लंगर और भंडारे की परंपरा सालों पुरानी प्रशासन के इस संशोधित फैसले के बाद क्षेत्र में राहत की भावना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चौरासी मंदिर परिसर में लंगर और भंडारे की परंपरा सालों पुरानी है, जिसे किसी भी प्रकार की प्रशासनिक बाध्यता से जोड़ना उचित नहीं था। अनुमति की शर्त हटने से श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली है।