मोहन भागवत ने साफ किया कि स्वार्थ की वजह से सारे युद्ध हो रहे हैं। ऐसे में भारत ही इस युद्ध को रोक सकता है, क्योंकि भारत के लोग मनुष्यता का कानून मानकर चलते है, लेकिन बाकी दुनिया जंगल का कानून मानती है। 

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