हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों में बसे धर्मशाला से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ नगर निगम कार्यालय की इमारत के ठीक बगल में सरेआम वन संपदा को नष्ट किया जा रहा है और पर्यावरण नियमों को ताक पर रख दिया गया है। अधिकारी इसको लेकर लीपापोती में लगे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि यह पूरी अवैध गतिविधि नगर निगम के कमिश्नर, ट्री ऑफिसर और एसडीओ (SDO) के कमरों की खिड़कियों से स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, इसके बावजूद इस बर्बादी को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए। उल्टा इस पूरे मामले पर अब अधिकारियों के बयानों में बड़ा विरोधाभास (Contradiction) सामने आया है। धर्मशाला की जीवनरेखा ‘चरान खड्ड’ पर संकट; निचले गांवों के डूबने का खतरा स्मार्ट सिटी के बड़े-बड़े दावों के बीच हो रही इस अवैध डंपिंग के कारण धर्मशाला की जीवनरेखा मानी जाने वाली ‘चरान खड्ड’ के वजूद पर खतरा मंडराने लगा है। खड्ड के ठीक किनारे भारी मात्रा में मिट्टी और मलबा डाला जा रहा है। आगामी मानसून सीजन से ठीक पहले की जा रही यह डंपिंग निचले ग्रामीण इलाकों के लिए एक बड़े टाइम बम की तरह है, जिससे आने वाले दिनों में भारी तबाही और बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। अधिकारियों के विरोधाभासी बयानों से खड़ा हुआ बड़ा सवाल इस गंभीर विवाद पर जब ट्री ऑफिसर तनवी गुप्ता से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि यह एक डिक्लेयर साइट (घोषित स्थल) है और इस संबंध में नगर निगम के SDO ही कोई आधिकारिक जानकारी दे सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह जरूर स्वीकार किया कि इस गतिविधि से स्थानीय वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है। एसडीओ ने अपने बयान से दिया नया मोड़ इसके बाद जब नगर निगम के SDO जोगिंदर सिंह से संपर्क किया गया, तो उन्होंने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। SDO ने बताया, “यहाँ पर एक पार्क का निर्माण किया जाना है, जिसके टेंडर भी जारी किए जा चुके हैं। पार्क के मैदान को समतल और तैयार करने के लिए मिट्टी की आवश्यकता थी, इसीलिए यहाँ पर मिट्टी फेंकी जा रही है।” SDO के इस कबूलनामे ने नगर निगम के उन अन्य उच्च अधिकारियों के दावों की पोल खोल दी है, जो अब तक अनजान बनने का नाटक करते हुए कह रहे थे कि उन्हें मिट्टी फेंकने वाले या इसकी अनुमति के बारे में कोई जानकारी नहीं है। 3 पॉइंट में समझिए क्यों गहराया है यह पूरा विवाद: 1. सरेआम लापरवाही (₹7.54 करोड़ का प्रोजेक्ट): चरान खड्ड के पास बन रहे ₹7.54 करोड़ के एक बड़े प्रोजेक्ट (जिसमें इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, म्यूजिकल थीम पार्क और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स शामिल हैं) के पास पर्यावरण नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। गौरतलब है कि इस भव्य भवन का नींव पत्थर 21 जनवरी 2019 को तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने रखा था, लेकिन आज यह स्थान प्रशासनिक लापरवाही का केंद्र बन चुका है। 2. मानसून से पहले भारी तबाही का खतरा: अधिकारियों के लिए यह महज एक पार्क का निर्माण या मिट्टी का भराव हो सकता है, लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञों ने इसे बेहद खतरनाक बताया है। मानसून से ठीक पहले खड्ड के बिल्कुल मुहाने पर इस तरह ढीली मिट्टी फेंकने से बारिश के दिनों में यह पूरी मिट्टी बहकर खड्ड के प्राकृतिक प्रवाह (रास्ते) को रोक देगी। इससे पानी का रुख बदलेगा और निचले ग्रामीण इलाकों में भारी बाढ़ व भूस्खलन आ सकता है, जिससे जान-माल का बड़ा नुकसान संभव है। 3. पर्यावरणविदों की एक्शन की तैयारी (हाईकोर्ट में PIL): विकास के नाम पर धर्मशाला की ‘लाइफ लाइन’ (चरान खड्ड) से हो रहे इस खतरनाक खिलवाड़ के खिलाफ स्थानीय पर्यावरणविदों ने अब आर-पार की लड़ाई का मोर्चा खोल दिया है। प्रख्यात पर्यावरणविद पवन पुरोहित ने दोटूक शब्दों में कहा कि प्रशासन की इस घोर लापरवाही और प्रकृति की बर्बादी के खिलाफ हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर करने के लिए पुख्ता सैटेलाइट इमेजेस, दस्तावेज़ और वीडियो सबूत जुटाए जा रहे हैं, ताकि जिम्मेदार अधिकारियों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके।