ब्रिटिश शासनकाल की यादें समेटे कांगड़ा के धर्मशाला के मैक्लोडगंज की ऐतिहासिक ‘कैमल हंप रोड’ अब एक नए रूप में दुनिया के सामने आने वाली है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रस्ताव पर इस प्राचीन ट्रैक को जीपबल (वाहनों के योग्य) सड़क में तब्दील करने की योजना को मंजूरी मिल गई है। लगभग 2.2 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के जीर्णोद्धार पर 6 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस परियोजना का उद्देश्य न केवल पर्यटन को बढ़ावा देना है, बल्कि मैक्लोडगंज की संकरी सड़कों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम की समस्या का स्थायी समाधान निकालना भी है। ब्रिटिश काल की ‘सैरगाह’ का पुनरुद्धार: इस मार्ग का इतिहास 19वीं सदी के मध्य से जुड़ा है, जब धर्मशाला अंग्रेजों की ग्रीष्मकालीन राजधानी और सैन्य छावनी हुआ करता था। उस दौर में अंग्रेज अधिकारियों ने अपने परिवारों, विशेषकर महिलाओं की शाम की सैर और ताजी हवा के लिए इस शांत वॉक-वे को विकसित किया था। घने देवदार के जंगलों के बीच से गुजरने वाला यह ट्रैक उस समय सुरक्षित और एकांत मार्ग के रूप में जाना जाता था। इतिहासकारों के अनुसार, इसकी ढलान ऐसी बनाई गई थी कि घोड़े और ऊंट भी इस पर आसानी से चल सकें। नाम के पीछे की दिलचस्प कहानी: इस सड़क की सबसे बड़ी खासियत इसकी भौगोलिक बनावट है। पहाड़ी ढलानों और प्राकृतिक उतार-चढ़ाव के कारण यह मार्ग दूर से देखने पर ऊंट के कूबड़ (Camel Hump) जैसा नजर आता है। यही कारण है कि इसे ‘कैमल हंप रोड’ नाम दिया गया। देवदार के पेड़ों के बीच स्थित इस मार्ग की प्राकृतिक सुंदरता आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। जीर्णोद्धार के दौरान सरकार का विशेष जोर इस बात पर है कि देवदार के वनों और इसके प्राकृतिक ढांचे को कोई नुकसान न पहुँचे।

Spread the love