हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में अवैध खनन के खिलाफ पुलिस ने अपना शिकंजा पूरी तरह कस दिया है। नूरपुर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत शनिवार (18 जनवरी 2026) को बड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई। इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने अवैध खनन में लिप्त 1 जेसीबी और 7 ट्रैक्टरों को मौके पर ही जब्त कर लिया, जिससे क्षेत्र के खनन माफिया में हड़कंप मच गया है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह सुनियोजित कार्रवाई पुलिस थाना इंदौरा के तारा खड्ड (गुज्जर कॉलोनी मंड क्षेत्र) और पुलिस थाना ज्वाली के अंतर्गत आने वाले विभिन्न संवेदनशील इलाकों में की गई। पुलिस की टीमों ने गुप्त सूचना के आधार पर इन क्षेत्रों में दबिश दी, जहाँ बड़े पैमाने पर प्राकृतिक संसाधनों का अवैध दोहन किया जा रहा था। पुलिस की धमक देखते ही कई लोग मौके से भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन पुलिस ने वाहनों को घेराबंदी कर कब्जे में ले लिया। माइनिंग एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई इस विशेष अभियान के दौरान जब्त किए गए सभी 8 वाहनों को ‘माइनिंग एक्ट’ (खनन अधिनियम) के तहत पुलिस कब्जे में लिया गया है। पुलिस ने सभी वाहनों के चालान काटकर संबंधित आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस की इस सख्त कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी संपत्ति और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। अदालत भेजे जाएंगे चालान
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि माइनिंग एक्ट के तहत तैयार किए गए सभी चालानों को आगामी कानूनी कार्रवाई के लिए माननीय अदालत में भेजा जा रहा है। आरोपियों को अब अदालत में पेश होकर भारी जुर्माना और कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करना होगा। पुलिस वाहनों के मालिकों और इस अवैध कारोबार के पीछे के मुख्य चेहरों की भी शिनाख्त कर रही है। अभियान रहेगा जारी: एसपी नूरपुर जिला पुलिस नूरपुर ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई महज एक दिन की नहीं है। अवैध खनन के खिलाफ यह अभियान आने वाले दिनों में और अधिक तीव्रता के साथ जारी रहेगा। पुलिस ने चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति नियमों का उल्लंघन कर अवैध खनन में लिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाए जाएंगे। जनता से सहयोग की अपील
पुलिस प्रशासन ने स्थानीय जनता से भी अपील की है कि यदि उनके क्षेत्र में कहीं भी अवैध खनन या तस्करी की गतिविधियां नजर आती हैं, तो वे तुरंत पुलिस को सूचित करें। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा। पुलिस का मानना है कि जनता के सहयोग से ही इस प्राकृतिक लूट को जड़ से खत्म किया जा सकता है।