हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में 10 जुलाई से आधिकारिक रूप से शुरू होने वाली श्रीखण्ड महादेव यात्रा पर प्रशासन और श्रीखण्ड महादेव यात्रा ट्रस्ट के तमाम सख्त फरमानों के बावजूद, श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह के आगे व्यवस्थाएं बेबस नजर आ रही हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी, कि तय तारीख से पहले कोई भी यात्रा पर नहीं निकलेगा, अन्यथा कड़ी कार्यवाही होगी, इसका जमीनी असर कहीं नजर नहीं आ रहा। बटालियन के आने का इंतजार हकीकत ये है कि डेढ़-दो माह पहले से ही हजारों श्रद्धालु श्रीखण्ड महादेव के दर्शन कर चुके हैं। यात्रा ट्रस्ट अभी भी बटालियन के आने का इंतजार कर रहा है, ताकि सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए जा सकें, लेकिन तब तक हजारों यात्री बर्फीले और जोखिम भरे रास्तों से होकर दर्शन कर चुके हैं। खाने-पीने और ठहरने की व्यवस्था गत माह 10 जून को ही श्रीखण्ड महादेव के दर्शन कर लौटे पूर्ण सक्सेना बताते हैं कि वे 7 जून को बेस कैंप सिंह गाड से अपने साथियों के अलावा करीब 70 अन्य यात्रियों संग रवाना हुए और 10 जून को श्रीखण्ड शिखर के दर्शन कर लौट आए। रास्ते में हर पड़ाव पर हजारों श्रद्धालुओं के लिए खाने-पीने और ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था पहले से ही दिखी। थाचडू, भीमडवारी जैसे प्रमुख पड़ावों पर एक हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं के ठहरने, खाने आदि की व्यवस्था थी, जबकि कुंशा, भीम तलाई, कालीघाटी जैसे पड़ावों पर भी सैकड़ों श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं मौजूद थी। पिछले साल हुई थी 5 लोगों की मौत श्रीखण्ड यात्रा को उतर भारत की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में गिना जाता है। करीब 32 से 40 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा में श्रद्धालुओं को बर्फ से ढके खतरनाक ग्लेशियर, नाले और ऑक्सीजन की कमी जैसे कठिन हालातों का सामना करना पड़ता है। पिछले 12 वर्षों में इस यात्रा में 42 श्रद्धालु अपनी जान गंवा चुके हैं, जिनमें सिर्फ पिछले साल ही 5 यात्रियों की मौत हुई थी। रेस्क्यू टीम के साथ बेस कैंप स्थापित ट्रस्ट हर पड़ाव पर सुरक्षा, मेडिकल और रेस्क्यू टीम के साथ बेस कैंप स्थापित करता है, जिसमें पुलिस और होमगार्ड के जवान भी तैनात रहते हैं, लेकिन यह सब 10 जुलाई से आधिकारिक यात्रा शुरू होने के बाद ही पूरी तरह सक्रिय होगा, लेकिन प्रशासन की चेतावनी और ट्रस्ट के फरमानों के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह ऐसा है कि जोखिम उठाकर भी हजारों लोग पहले ही दर्शन कर चुके हैं। चोरी छिपे यात्रा पर निकलना गलत-एसडीएम एसडीएम निरमंड एवं श्रीखण्ड महादेव यात्रा ट्रस्ट के उपाध्यक्ष मनमोहन सिंह ने कहा कि कुछ श्रद्धालु शिमला जिले के फांचा की तरफ से या फिर निरमंड की ओर से स्थानीय लोगों की मदद से चोरी-छिपे यात्रा पर निकल जाते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही बटालियन मौके पर पहुंचेगी, ऐसे यात्रियों को रास्ते में ही रोका जाएगा और आधिकारिक तिथि के बाद ही आगे बढ़ने दिया जाएगा।

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