कांगड़ा के धर्मशाला में दलाई लामा के निवास पर आयोजित 15वीं तिब्बती धार्मिक नेताओं की बैठक का अंतिम सत्र शुक्रवार को संपन्न हुआ। बैठक में तिब्बत की विभिन्न बौद्ध परंपराओं के प्रमुख धर्मगुरु उपस्थित थे। दलाई लामा ने कहा कि निर्वासन में कई वर्ष बीतने के बावजूद तिब्बती लोग मजबूत बने हुए हैं। उन्होंने तिब्बती धर्म और संस्कृति को जीवित रखने के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने बोधिचित्त के महत्व पर प्रकाश डाला। दलाई लामा सभी प्राणियों के लिए कार्य करने को तत्पर ड्रिकुंग चेतसांग रिनपोछे ने कहा कि 90 वर्ष की आयु में भी दलाई लामा सभी प्राणियों के लिए कार्य करने को तत्पर हैं। खेंपो नेगेडो ने बताया कि दलाई लामा को उनकी संस्था को जारी रखने और पुनर्जन्म के लिए कई अनुरोध मिले हैं। बैठक में इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया गया। सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग ने तीन महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत किए। इनमें चीन द्वारा दलाई लामा के पुनर्जन्म के राजनीतिकरण को अस्वीकार करना और दलाई लामा के हालिया वक्तव्य का समर्थन शामिल था। बैठक में दलाई लामा के दाईं ओर साक्य त्रिज़िन, मेनरी त्रिचेन रिनपोछे, ड्रिकुंग चेतसांग रिनपोछे और तकलुंग मत्रुल रिनपोछे विराजमान थे। बाईं ओर गदेन त्रि रिनपोछे, मिनलिंग खेंचेन, खेंपो नेगेडो और जोनंग ग्याल्त्साप बैठे थे। दलाई लामा की दीर्घायु की कामना की सभी धर्मगुरुओं ने दलाई लामा की दीर्घायु की कामना की। मिनलिंग खेंचेन ने आशा व्यक्त की कि दलाई लामा एक दिन तिब्बत की धरती पर वापस लौटेंगे। साक्य त्रिज़िन ने उनके विचारों को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने की आवश्यकता पर बल दिया। लाई लामा की शिक्षाओं, सेवा और करुणा की सराहना मीनरी त्रिचेन रिनपोछे, ड्रिकुंग चेतसांग रिनपोछे, तागलुंग मत्रुल और जोनंग ग्याल्त्साप ने भी दलाई लामा की शिक्षाओं, सेवा और करुणा की सराहना की। मीनरी त्रिचेन रिनपोछे, ड्रिकुंग चेतसांग रिनपोछे, तागलुंग मत्रुल और जोनंग ग्याल्त्साप ने भी दलाई लामा की शिक्षाओं, सेवा और करुणा की सराहना की। धार्मिक मामलों के सचिव दुदुल दोरजी ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ बैठक का समापन करते हुए कहा, “बुद्ध धर्म दुनिया की भलाई का स्रोत है, यह बना रहे, लामा दीर्घायु हों और तिब्बती समुदाय एकजुट रहे।”