हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में उद्यान विभाग ने मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए 7 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत की है। राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड द्वारा वित्त पोषित शिविर का उद्घाटन उद्यान विभाग के उपनिदेशक भूपेंद्र सिंह नेगी ने किया। उपनिदेशक नेगी ने बताया कि किन्नौर में वर्तमान में 5 हजार मधुमक्खी बॉक्स हैं। इनसे 42 मौन पालक अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। शिविर का मुख्य उद्देश्य और किसानों को इस व्यवसाय से जोड़ना है। फलों के परागण में भी मदद हिमाचल प्रदेश में मधुमक्खी पालन का इतिहास 1962 से जुड़ा है। उस समय नगरोटा बंगवा में एपिस मेलिफेरा प्रजाति की मधुमक्खियां लाई गई थी। यह प्रजाति अन्य मधुमक्खियों से अलग किस्म का शहद उत्पादन करती है। फल वैज्ञानिक डॉ. अरुण नेगी ने शिविर में मधुमक्खी पालन के दोहरे फायदे बताए। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ शहद मिलता है, बल्कि सेब, खुरमानी, नाशपाती और बादाम जैसे फलों के परागण में भी मदद मिलती है। राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड में होगा पंजीकरण इससे फलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है। शिविर में भाग लेने वाले सभी किसानों का राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड में पंजीकरण किया जाएगा। इस प्रशिक्षण से किसानों को मधुमक्खी पालन की बारीकियां सिखाई जाएंगी, जिससे वे इसे एक लाभदायक व्यवसाय के रूप में अपना सकें।

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