हिमाचल प्रदेश में बीते साल की प्राकृतिक आपदा का मुद्दा राज्यसभा में गूंजा। महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद एवं हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने कहा कि दो साल में आपदा से हिमाचल में भारी नुकसान हुआ। कुल्लू-मनाली में सड़कें-रास्ते बह गए। आपदा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल का दौरा किया और 1500 करोड़ रुपए का स्पेशल राहत पैकेज देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि आज तक 15 रुपए भी नहीं दिए गए। हिमाचल में भी आपदा राहत राशि को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस बार-बार केंद्र की बीजेपी सरकार पर निशाना साधती रही है। रजनी पाटिल द्वारा राज्यसभा में मामला उठाए जाने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और संवैधानिक बहस का मुद्दा बन गया है, क्योंकि 2023 और 2025 में राज्य में सदी की सबसे भीषण तबाही मानसून के दौरान हुई है। बीते साल 9 सितंबर को हिमाचल आए थे PM मोदी बता दें कि बीते साल भारी बारिश से हुई तबाही का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 सितंबर को स्वयं धर्मशाला पहुंचे। यहां पर प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने उन्हें नुकसान की प्रेजेंटेशन दी और बाढ़, बादल फटने से हुई तबाही से अवगत कराया। इसके बाद PM ने हिमाचल प्रदेश के लिए 1500 करोड़ रुपए के विशेष आपदा राहत पैकेज की घोषणा की। मगर छह महीने बाद भी यह राशि राज्य को जारी नहीं की गई है। CM दिल्ली जाकर कई बार राहत राशि की मांग कर चुके हिमाचल सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू भी कई बार पीएम मोदी द्वारा घोषित राहत राशि को जारी करने का केंद्र से आग्रह कर चुके हैं। राज्य सरकार के मंत्री भी बार-बार इसे लेकर केंद्र की बीजेपी सरकार को घेरते रहे हैं। डिप्टी सीएम बोले- केंद्र से हिमाचल को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा हिमाचल के डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने रजनी पाटिल द्वारा राज्यसभा में आपदा राहत राशि का मामला उठाने के लिए उनका आभार जताया। मुकेश ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा कि प्रदेश हर वर्ष भीषण आपदाओं और बाढ़ की मार झेल रहा है, लेकिन इसके बावजूद भी प्रदेश को केंद्र से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री जी की घोषणाओं के बाद भी हिमाचल को उसका अधिकार नहीं मिल पा रहा है। केंद्र सरकार से आग्रह है कि आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए हिमाचल प्रदेश को आवश्यक राहत एवं सहायता प्रदान करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

Spread the love