हिमाचल प्रदेश में मानसून धीमा पड़ गया है। मौसम विभाग की बार बार फ्लैश-फ्लड और भारी बारिश की चेतावनी के बाद भी अच्छी बारिश नहीं हो रही है। प्रदेश में पूरे मानसून सीजन के दौरान नॉर्मल से 42 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इसकी मार सेब के साथ साथ किसानों की नगदी फसलों पर पड़ रही है। मौसम विभाग ने आज भी मंडी कांगड़ा और चंबा में फ्लैश-फ्लड की चेतावनी जारी कर रखी है। इस तरह मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर जिला में भारी बारिश का अलर्ट दिया गया था। मगर बीते 24 घंटे के दौरान इक्का दुक्का स्थानों पर ही हल्की बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में 28 मई तक प्रदेश में बारिश के आसार है। 26 से 28 जुलाई तक ज्यादा बारिश का पूर्वानुमान है। सभी जिलों में नॉर्मल से कम बरसात हिमाचल में एक भी जिला ऐसा नहीं है जहां नॉर्मल से ज्यादा बादल बरसे हो। चंबा, किन्नौर, लाहौल स्पीति, सिरमौर और ऊना जिला में तो 50 प्रतिशत से भी कम बारिश इस मानसून सीजन में हुई है। प्रदेश में एक जून से 23 जुलाई के बीच 275.4 मिलीमीटर नॉर्मल बारिश होती है। मगर इस बार 159.5 मिलीमीटर ही बादल बरसे है। ​​​​​​लाहौल स्पीति जिला में तो नॉर्मल से 75 प्रतिशत, सिरमौर जिला में 58 प्रतिशत और चंबा में भी सामान्य से 54 प्रतिशत कम बादल बरसे हैं। 5500 करोड़ के सेब उद्योग पर संकट प्रदेश में बारिश नहीं होने से 5500 करोड़ रुपए का सेब उद्योग खतरे में पड़ गया है। सेब के बगीचे विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ गए हैं। सूखे के कारण सेब का अच्छा आकार भी नहीं बन पा रहा। इससे उत्पादन में गिरावट आएगी। जमीन में पर्याप्त नमी नहीं होने की वजह से सेब के दाने फटने भी शुरू हो गए हैं। इसी तरह किसानों की नगदी फसलें टमाटर, फूलगोभी, बंदगोभी, शिमला मिर्च पर सूखे की मार पड़ रही है।

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