हिमाचल की शिमला संसदीय सीट से कांग्रेस 2 बार के BJP सांसद रहे वीरेंद्र कश्यप को मैदान में उतार सकती है। सूत्रों की माने तो वीरेंद्र कश्यप भारतीय जनता पार्टी को अलविदा कह सकते हैं। कांग्रेस नेताओं की वीरेंद्र कश्यप के साथ 2 दौर की मीटिंग हो चुकी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू बीती रात को ही 5 दिन बाद शिमला लौटें हैं। संभव है कि एक-दो दिन में CM से चर्चा के बाद वीरेंद्र कश्यप को शिमला लोकसभा से टिकट देने को लेकर सहमति बन सकती है। हालांकि अंतिम फैसला 5 व 6 अप्रैल को दिल्ली में होने जा रही स्क्रीनिंग और केंद्रीय चुनाव समिति में होगा। इससे पहले मुख्यमंत्री सुक्खू वीरेंद्र कश्यप को मीटिंग के लिए शिमला भी बुला सकते हैं। कांग्रेस के पास अभी मजबूत चेहरा नहीं
फिलहाल शिमला संसदीय हलके में कांग्रेस के पास कोई मजबूत चेहरा नहीं है। अभी पच्छाद विधानसभा से 2022 का चुनाव लड़ चुकी दयाल प्यारी, कांग्रेस अनुसूचित जाति मोर्चा अध्यक्ष अमित नंदा, पूर्व विधायक सोहन लाल का नाम चर्चा में है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी BJP के 2009 और 2014 में 2 बार MP रहे वीरेंद्र कश्यप पर दांव खेलना चाह रही है। कांग्रेस के पक्ष में समीकरण
2022 के विधानसभा के रिजल्ट के आधार पर शिमला संसदीय क्षेत्र के समीकरण कांग्रेस के पक्ष में नजर आ रहे हैं। शिमला हलके के 17 विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के पास 12 विधायक, BJP के पास 3 और एक इंडिपेंडेंट MLA है। सोलन जिले की 5 सीटों पर भाजपा का क्लीन स्विप हुआ है। वहीं सिरमौर में पांच में से 3 सीटें ही BJP जीत पाई है। शिमला जिले के 8 में 7 सीटें शिमला संसदीय क्षेत्र में है। इसमें से 6 पर कांग्रेस का कब्जा है। BJP के वोट बैंक पर सेंध लगाने का मकसद
इस लिहाज से शिमला हलके की राह BJP के लिए आसान नहीं है। ऐसे में यदि वीरेंद्र कश्यप कांग्रेस में शामिल हुए तो भाजपा के लिए यह बड़ा झटका साबित हो सकता है। वहीं कांग्रेस भी हर हाल में शिमला सीट को जीतना चाह रही है। इसके लिए वीरेंद्र कश्यप को पार्टी में शामिल करने की अंदरखाते तैयारी चल रही है। ऐसा करके पार्टी भाजपा के वोट बैंक पर सेंध लगाना चाह रही है। अब यह देखा जा रहा है कि कश्यप के आने से पार्टी में किस लेवल की बगावत होगी। शिमला संसदीय सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। पूर्व में शिमला सीट से सीटिंग MLA विनोद सुल्तानपुरी को लड़ाने की तैयार थी। मगर जिस तरह सरकार पर सियासी संकट आया है, उसे देखते हुए पार्टी ने सीटिंग MLA को चुनाव नहीं लड़ाने का निर्णय लिया है। इससे नए व मजबूत प्रत्याशी की तलाश है। BJP खेमे में मची खलबली
वीरेंद्र कश्यप के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा से भाजपा खेमे में खलबली मच गई है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी ने वीरेंद्र कश्यप की हरेक मूवमेंट पर नजर रखने के निर्देश दे दिए हैं। अगले एक-दो दिन में कश्यप शिमला आ सकते हैं। ऐसे में वह कहां जाते हैं और किससे मुलाकात करते हैं, इस पर नजर रखने को कह दिया गया है। भाजपा इस बात को बखूबी समझती है कि दो बार से सांसद वीरेंद्र कश्यप का कांग्रेस में पार्टी के बड़ा झटका साबित हो सकता है। शिमला सीट तीन बार हार चुकी कांग्रेस
शिमला लोकसभा सीट पर कांग्रेस को आखिरी बार 2004 में जीत हाथ लगी थी। तब धनीराम शांडिल सांसद चुने गए थे। इसके बाद 2009 व 2014 में वीरेंद्र कश्यप, 2019 में सुरेश कश्यप सांसद चुने गए। इस बार भी BJP ने सुरेश कश्यप को ही टिकट दिया है। ऐसे में वीरेंद्र कश्यप कांग्रेस में शामिल होते हैं तो उनका मुकाबला सुरेश कश्यप से हो सकता है।