पार्टी के भीतर मतभेद और विवादों के चलते 2025 में उन्हें BRS से सस्पेंड कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक राह चुनी और ‘तेलंगाना राष्ट्र सेना’ (TRS) के गठन के साथ नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की। 

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