भारतीय सेना के लिए हाईटेक ड्रोन बनाने और इसके लिए 3.5 करोड़ रुपए की ग्रांट मिलने के दावे से चर्चा में आए हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा का मामला अब सवालों के घेरे में है। रक्षा क्षेत्र में नए प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने वाली संस्था डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (DIO) के आधिकारिक X अकाउंट पर किए गए पोस्ट के बाद ग्रांट मिलने के दावे पर फर्जी बताया हैं। इस बीच सर्वेश शर्मा बुधवार को कॉलेज हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्हें हमीरपुर से चंडीगढ़ PGI रेफर किया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह राशि वास्तव में मंजूर हुई थी या नहीं? 3.5 करोड़ रुपए मंजूर होने की जानकारी सबसे पहले कहां से आई? क्या रक्षा मंत्रालय या संबंधित संस्था से इसकी पुष्टि की गई थी? अगर पुष्टि हुई थी, तो क्या जानकारी दी गई थी? DIO के X अकाउंट पर एक दिन पहले किए गए पोस्ट के बाद ग्रांट को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत बढ़ गई है। इन सवालों के जवाब अभी सामने आने बाकी हैं। हमीरपुर पुलिस अब इन सवालों के जवाब खोजने में जुट गई है। पॉलीटेक्निक कॉलेज बड़ू के स्टूडेंट हैं सर्वेश सर्वेश शर्मा, राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज बड़ू में कंप्यूटर साइंस के 5वें सेमेस्टर के छात्र हैं। मीडिया में पहले प्रकाशित खबरों में बताया गया था कि वह सेना के लिए ‘रुद्रा एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’ नाम का ड्रोन विकसित कर रहे हैं। यह ड्रोन सीमा पर निगरानी के काम आना था। इसके लिए 3.50 करोड़ रुपए की ग्रांट मिलने और प्रोजेक्ट को IIT रुड़की में विकसित किए जाने की बात कही गई थी। प्रोजेक्ट को 20 महीने में पूरा करने का लक्ष्य बताया गया था। मगर DIO के पोस्ट के हिसाब से यह दावे झूठे लग रहे है। राज्यपाल और सांसद ने सम्मानित किया ड्रोन बनाने और करोड़ों रुपए की ग्रांट मिलने की खबरों के बाद एक मजदूर के बेटे सर्वेश शर्मा चर्चा में आए थे। उनकी उपलब्धि को लेकर राज्यपाल कविंद्र गुप्ता और सांसद अनुराग ठाकुर ने उन्हें सम्मानित किया। छात्र के घायल होने की घटना की भी जांच इसी बीच सर्वेश शर्मा गिरकर घायल हो गए। अब इसे लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हो रही है? हमीरपुर पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। एसपी हमीरपुर बलबीर सिंह के अनुसार, पुलिस सभी पहलुओं को देख रही है। छात्र गिरने से घायल हुआ? या चक्कर आया? या फिर घायल होने के पीछे कोई और वजह है? यह पुलिस जांच में ही स्पष्ट हो पाएगा। मगर अभी कोई भी पुलिस अधिकारी इस मामले में खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। इसे लेकर क़ॉलेज का पक्ष जानने के लिए प्रिंसिपल को भी कई बार संपर्क किया गया। मगर उनके द्वारा फोन नहीं सुनने की वजह से क़ॉलेज का पक्ष नहीं मिल पाया।