हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि ई-गवर्नेंस का लक्ष्य सरकारी सेवाओं को आम लोगों के लिए सरल और पारदर्शी बनाना है। उन्होंने शुक्रवार को धर्मशाला में प्रशासनिक सुधार और ई-गवर्नेंस पर 2 दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। इसमें देशभर के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार का उद्देश्य व्यवस्था में बदलाव लाना है, ताकि हिमाचल समृद्ध और आत्मनिर्भर बने। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सरकार की पहलों का जिक्र किया।सुक्खू ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर खास ध्यान है। साल 2021 में प्रदेश शिक्षा में 21वें स्थान पर था, जो अब पांचवें पर आ गया है। स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार हुआ है। प्रदेश के पांचों मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी शुरू की गई है। पुराने मेडिकल उपकरण बदले, विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती हुई और उनका वेतन बढ़ाया गया। सिंगल विंडो सिटीजन पोर्टल और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ी। सुक्खू ने कहा कि प्रदेश की करीब 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, इसलिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। प्राकृतिक खेती से पैदा गेहूं 80 रुपए, कच्ची हल्दी 150 रुपए, मक्का 50 रुपए और अदरक 50 रुपए प्रति किलो की दर से खरीदने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का दर्जा दिया सरकार अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का दर्जा देकर उनकी शिक्षा, भरण-पोषण और आवास की जिम्मेदारी उठा रही है। 12 लाख रुपए तक वार्षिक पारिवारिक आय वाले परिवारों के विद्यार्थियों को विदेश में पढ़ाई के लिए 20 लाख रुपए तक ऋण सुविधा देने की बात भी कही। इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि हिमाचल के जंगल, नदियां और जलविद्युत संसाधन देश की पर्यावरणीय और ऊर्जा सुरक्षा में योगदान देते हैं, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और पर्यावरण बचाने की लागत का बड़ा हिस्सा प्रदेश को उठाना पड़ता है। पहाड़ी राज्यों की इन चुनौतियों को देखते हुए विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी है।