हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सुक्खू सरकार ने नए जिलों के गठन का दांव खेला है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस काम के लिए कमीशन का गठन कर लिया है। सरकार ने रिटायर जस्टिस धर्मचंद की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमीशन बना लिया है। सरकार द्वारा गठित कमीशन को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट तैयार करनी होगी और सरकार से जिलों के पुनर्गठन की सिफारिश करेगा। इसके आधार पर सरकार जिलों के गठन का फैसला करेगी। इसका उद्देश्य जिलों, उपमंडल, तहसीलों और विकास खंडों की समीक्षा करना है। आयोग को केवल नए जिले बनाने की संभावनाएं ही नहीं देखनी हैं, बल्कि यह भी बताना है कि मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव कहां जरूरी है, इसे कम खर्च में कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। पहले भी उठती रही जिलों के गठन की मांग हिमातल में नए जिले बनाने की मांग लंबे समय से उठती रही है। खासकर कांगड़ा जिले के नूरपुर, देहरा और पालमपुर जैसे क्षेत्रों में जिला मुख्यालय दूर होने के कारण अलग जिले की मांग की जाती रही है। साल 2012 में तत्कालीन भाजपा सरकार के समय भी नए जिले बनाने की संभावना पर चर्चा हुई थी, लेकिन योजना आगे नहीं बढ़ पाई। इसी तरह शिमला जिला में रोहड़ू व रामपुर, मंडी में सुंदरनगर को अलग जिला बनाने की मांग उठी। साल 2022 में भी विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा उठा। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आयोग का गठन होने से इस विषय पर फिर बहस शुरू हो गई है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण मामला यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि हिमाचल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में प्रशासनिक पुनर्गठन की इस पहल को उसके प्रशासनिक उद्देश्य, वित्तीय प्रभाव और चुनाव से पहले के राजनीतिक संदर्भ तीनों नजरियों से देखा जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि देहरा को जिला बनाकर सत्ता की चाबी तय करने वाले कांगड़ा को साधने की कोशिश हो सकती है। देहरा से वर्तमान में सीएम सुक्खू की धर्मपत्नी कमलेश ठाकुर विधायक है।

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