तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु 14वें दलाई लामा ने लद्दाख के युवाओं से नशे और नशीले पदार्थों से दूर रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जीवन में वास्तविक खुशी धन, शक्ति या भौतिक उपलब्धियों में नहीं, बल्कि मानसिक शांति, करुणा और दूसरों की सहायता करने में मिलती है। उन्होंने नशे को विनाशकारी आदत बताते हुए युवाओं से सकारात्मक सोच और आत्मसंयम अपनाने का आह्वान किया। दलाई लामा ने हाल ही में युवाओं के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए बताया कि कई ने मानसिक तनाव, भय, क्रोध और साथियों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को लेकर चिंता व्यक्त की थी। इसी को देखते हुए उन्होंने युवाओं को स्वस्थ, संतुलित और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हुए यह संदेश जारी किया। जीवन का मूल उद्देश्य खुशी प्राप्त करना उन्होंने कहा कि जीवन का मूल उद्देश्य खुशी प्राप्त करना है, लेकिन यह वास्तविक खुशी मानसिक शांति और दूसरों के कल्याण में योगदान देने से मिलती है। दलाई लामा ने युवाओं को “वाइज सेल्फिशनेस” यानी बुद्धिमानी भरी स्वार्थपरता का संदेश देते हुए कहा कि जब व्यक्ति दूसरों की भलाई के लिए काम करता है, तो इससे उसका अपना जीवन भी बेहतर होता है। बाहर निकलने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और साहस जरूरी दलाई लामा ने कहा कि नशीले पदार्थों का सेवन व्यक्ति को दुख, पीड़ा और विनाश की ओर ले जाता है। उन्होंने युवाओं से किसी भी परिस्थिति में नशे की गिरफ्त में न आने की अपील की। साथ ही, उन्होंने उन युवाओं के साहस की सराहना की, जो नशे की लत छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौटने का प्रयास कर रहे हैं। इस बुराई से बाहर निकलने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और साहस जरूरी है। युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील को पुलिस का समर्थन दलाई लामा के संदेश के बाद लद्दाख पुलिस ने भी युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील का समर्थन किया है। पुलिस ने कहा कि युवा पीढ़ी को नशीले पदार्थों के खतरे से बचाना उसकी प्राथमिकता है। इसके लिए नशे की तस्करी और अवैध गतिविधियों के खिलाफ अभियान चलाए जा रहे हैं। कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि नशा मुक्त समाज बनाने के लिए केवल कानून का पालन कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज, परिवार और युवाओं की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।

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