शिमला जिले के रामपुर उपमंडल के नोगली में आयोजित होने वाला तीन दिवसीय ऐतिहासिक जिला स्तरीय नोगली मेला (शाड़ की जातर) देव विदाई के साथ पारंपरिक हर्षोल्लास और रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हो गया। मेले के अंतिम दिन रविवार को शलाटी घोड़ी के मुख्य अधिष्ठाता देवता साहिब नरेशर लक्ष्मी नारायण कुमसू सहित अन्य देवी-देवताओं ने मेला मैदान में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया और अपने-अपने देवालयों की ओर प्रस्थान किया। मेले के तीसरे व अंतिम दिन का मुख्य आकर्षण देवी-देवताओं का अलौकिक नृत्य और देव मिलन रहा। सभी देवी-देवता अपने अस्थाई ठहराव स्थलों से देवलुओं (देव-पुजारियों) के साथ पारंपरिक वाद्य यंत्रों—ढोल, नगाड़े और करनाल—की सुरीली धुनों पर नाचते-गाते हुए मुख्य मेला मैदान पहुंचे। देवताओं के इस भव्य और सुंदर नृत्य को देखने के लिए रामपुर और आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े। दिनभर मेला मैदान महानाटी (लोकनृत्य) के रंग में रंगा रहा, जहाँ स्थानीय लोग और देवलू देर शाम तक जमकर झूमे। मेले के अंतिम दिन न केवल सांस्कृतिक और धार्मिक रंग देखने को मिला, बल्कि व्यापारिक दृष्टिकोण से भी माहौल बेहद खुशनुमा रहा। जलेबी-पकौड़ों का स्वाद और झूलों का आनंद मेले में सजी विभिन्न दुकानों पर लोगों ने जमकर खरीदारी की। विशेष रूप से महिलाओं और परिवारों ने जलेबियों और गर्मा-गर्म पकौड़ों का जमकर स्वाद चखा और खरीदारी की।बाहरी राज्यों और दूर-दराज के क्षेत्रों से आए व्यापारियों ने बताया कि इस बार मेले में उनका कारोबार काफी संतोषजनक और मुनाफे वाला रहा। बच्चों के मनोरंजन के लिए मेले में लगाए गए विभिन्न प्रकार के झूलों और मिकी माउस (डोल) पर बच्चों की भारी भीड़ देखी गई, जिसका नन्हे-मुन्नों ने खूब लुत्फ उठाया। पारंपरिक रीति-रिवाजों से दी गई विदाई नोगली मेला कमेटी के अध्यक्ष कृष्ण गोपाल ने बताया कि देव विदाई के साथ ही इस वर्ष का जिला स्तरीय नोगली मेला पूरी तरह सफल रहा है। सभी देवी-देवताओं को हमारी समृद्ध पहाड़ी संस्कृति और पारंपरिक विधि-विधान के साथ विदा किया गया। उन्होंने मेले को शांतिपूर्ण और भव्य तरीके से संपन्न कराने के लिए स्थानीय प्रशासन, पुलिस, देव समाज और क्षेत्र की जनता का विशेष आभार व्यक्त किया।