आस्था और रोमांच के प्रतीक माने जाने वाले सुप्रसिद्ध ‘किन्नौर कैलाश यात्रा’ पर जाने की उम्मीद लगाए बैठे श्रद्धालुओं को इस बार थोड़ा इंतजार करना होगा। किन्नौर जिला प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की जान-माल की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए आगामी आदेशों तक यात्रा को पूरी तरह स्थगित कर दिया है। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि बेहद दुर्गम रास्ते पर यात्रियों को किसी भी अप्रिय घटना या परेशानी का सामना न करना पड़े। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, यह पवित्र धार्मिक यात्रा इस वर्ष 1 जुलाई से शुरू होकर 30 जुलाई तक आयोजित की जानी थी। यात्रा की तैयारियों को परखने के लिए प्रशासन द्वारा एक विशेष आधिकारिक जांच टीम का गठन किया गया था। इस टीम द्वारा मार्ग का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद सौंपी गई ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर ही प्रशासन ने फिलहाल यात्रा को रोकने का यह बड़ा निर्णय लिया है। जांच टीम की रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा: एस.डी.एम. कल्पा एवं किन्नौर कैलाश यात्रा आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रवीन कुमार भारद्वाज ने बताया कि निरीक्षण टीम की रिपोर्ट में यात्रा मार्ग पर बड़े खतरे सामने आए हैं। इसके चलते यह निर्णय लिया गया है। प्रशासन ने देश-विदेश से आने वाले सभी श्रद्धालुओं और ट्रेकर्स से पुरजोर अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा के हित में फिलहाल किन्नौर का रुख न करें और आधिकारिक अनुमति मिलने से पहले इस खतरनाक मार्ग पर ट्रैकिंग करने का प्रयास बिल्कुल न करें। टीम ने क्या खतरे बताए खतरनाक ग्लेशियर: मेलिंग खटा से लेकर मुख्य कैलाश पॉइंट के बीच के रास्ते पर वर्तमान में विशालकाय ग्लेशियर मौजूद हैं। बढ़ते तापमान के कारण ये बर्फ के पहाड़ तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे इनके कभी भी ढहने (Avalanche) और भूस्खलन होने का गंभीर खतरा बना हुआ है। हवा में लटके पत्थर: गुफा से सोरंग के बीच का रास्ता बड़े-बड़े पत्थरों के गिरने से पूरी तरह बाधित हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, कई भारी-भरकम चट्टानें हवा में एक-दूसरे के सहारे बेहद संवेदनशील स्थिति में टिकी हुई हैं, जो जरा सी हलचल से नीचे गिर सकती हैं। इन्हें हटाने के लिए विशेष उपकरणों और काफी समय की आवश्यकता है। मार्ग सुरक्षित होने के बाद ही शुरू होगी यात्रा: एसडीएम सडीएम प्रवीन कुमार भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। जैसे ही क्षेत्र में मौसम साफ होगा, हवा में लटके पत्थरों को हटाकर मार्ग को पूरी तरह दुरुस्त और सुरक्षित प्रमाणित कर दिया जाएगा, उसके बाद ही यात्रा को दोबारा शुरू करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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