हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के बागासराहन स्थित वन देवता मंदिर में ‘रीक्रिएशनल एक्टिविटी’ (मनोरंजन गतिविधियों) के लिए जारी टेंडर अब विवादों में घिर गया है। टेंडर की अनुमानित लागत और आवंटन राशि में बड़े अंतर को लेकर हिमाचल प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (HPSIDC) पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। दरअसल, सरकारी उपक्रम HPSIDC ने बागासराहन में ‘रीक्रिएशनल एक्टिविटी’ का टेंडर लगाया, जिसकी अनुमानित लागत 4 लाख 43 हजार 379 रुपए रखी थी। इसका आवंटन 8 लाख 34 लाख 175 रुपए में किया गया। यानी अनुमानित राशि से 3 लाख 90 हजार 796 रुपए अधिक रेट पर काम आवंटित किया गया। ENC बोले-PWD में 5% से ज्यादा रेट पर नहीं दे सकते टेंडर हिमाचल में 95% से ज्यादा निर्माण कार्य करने वाले PWD के प्रमुख अभियंता एनपी सिंह ने जब पूछा गया तो उन्होंने बताया कि HPSIDC के मेन्यूअल को लेकर उन्हें जानकारी नहीं है, लेकिन PWD के मेन्यूअल के हिसाब से टेंडर अनुमानित कॉस्ट से सिर्फ 5% ज्यादा पर आवंटित हो सकता है। 67.92% ज्यादा रेट पर दिया टेंडर वहीं HPSIDC ने 67.92% फीसदी ज्यादा रेट पर ठेकेदार को टैंडर दिया है। सूत्र बताते हैं कि जिस महिला ठेकेदार को टैंडर दिया गया है, वह एक बड़े कांग्रेस नेता की रिश्तेदार है। इस टेंडर का वर्क ऑर्डर 18 अप्रैल 2026 को दिया गया। विपक्ष का आरोप है कि टेंडर देने की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई है और राजनीतिक रसूक के दबाव में आवंटन किया गया है। HPSIDC का तर्क- पुराने शेड्यूल से बना था टेंडर वहीं HPSIDC के एक्सईन सुशांत नेगी ने टेंडर प्रक्रिया पर सफाई देते हुए कहा कि यह टेंडर पुराने शेड्यूल के आधार पर तैयार किया गया था। उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर एनालाइज्ड रेट के आधार पर तैयार किए गए टेंडर में करीब 10 फीसदी तक अंतर हो सकता है, लेकिन यह टेंडर एनालाइज रेट पर आधारित नहीं था। उन्होंने कहा कि काम को जल्दी पूरा करने के निर्देश थे, इसलिए टेंडर जल्दी में तैयार किया गया, जिसके कारण टेंडर कॉस्ट अधिक दिखाई दे रही है। HPSIDC की कार्यप्रणाली पर सवाल अब सवाल उठ रहे है कि क्या नियमों के तहत 67.92 फीसदी अधिक रेट पर टेंडर आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी या इसमें किसी स्तर पर लापरवाही हुई? विपक्ष की मांग के बाद इस मामले में जांच की मांग तेज हो गई है। राज्य सरकार बार बार आर्थिक संकट का रोना रो रही है। ऐसे वक्त में लगभग डबल रेट पर टेंडर देने की वजह से HPSIDC की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आई है। टेंडर भरने वाले तीनों ठेकेदारों की भूमिका की जांच जरूरी ऐसे में सरकार को इस बात की भी जांच करनी चाहिए कि टेंडर भरने वाले तीनों ठेकेदारों का आपस में क्या रिश्ता है। कहीं जानबूझकर तो इन्होंने लगभग डबल रेट तो नहीं भरे, क्योंकि जब PWD मेन्यूअल के हिसाब से टेंडर 5% से ज्यादा रेट पर नहीं दिया जा सकता है, एल-1 ठेकेदार ने लगभग 68 फीसदी ज्यादा रेट कैसे भर दिए। जाहिर है कि एल-2 और एल-3 कॉट्रेक्टर के रेट 68 फीसदी से भी अधिक थे।