किन्नौर के पूह विकास खंड की ग्राम पंचायत रारंग में आयोजित 5 दिवसीय राज्यस्तरीय गुरु संज्ञास मेला पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो गया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी को अंतिम दिन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना था। हालांकि, खराब मौसम के कारण उनका हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका और वे कार्यक्रम में नहीं पहुंच पाए। उनकी अनुपस्थिति में बौद्ध धर्मगुरु छोईगेन रिन्पोछे ने मेले का विधिवत समापन किया। समारोह को संबोधित करते हुए छोईगेन रिन्पोछे ने बताया कि खराब मौसम के बावजूद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 2 बार आने का गंभीर प्रयास किया और वे हेलीपैड तक भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का दो बार प्रस्थान करना ही इस क्षेत्र के लोगों के लिए बहुत बड़ी बात है। रिन्पोछे ने पांच दिवसीय सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन, मूरंग के तहसीलदार और सभी संचालकों के सहयोग की सराहना की। उन्होंने इस धार्मिक व सांस्कृतिक उत्सव के पुण्य को मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पूरे प्रदेश की खुशहाली, सुख और शांति के लिए समर्पित किया। छोईगेन रिन्पोछे ने मेले के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रारंग में ‘गुरु संगेस’ (संज्ञास) उत्सव पिछले करीब 55 वर्षों से लगातार मनाया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और स्वर्गीय राजा वीरभद्र सिंह के आशीर्वाद, वर्तमान कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी के प्रयासों तथा स्थानीय ग्रामीणों की ग्राम सभा के विशेष आग्रह पर इसे ‘राज्य स्तरीय मेले’ का दर्जा प्राप्त हुआ है। रिन्पोछे ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी से जुड़ा एक ऐतिहासिक संस्मरण भी साझा किया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में जब इंदिरा गांधी कल्पा आई थीं, तब रारंग की ओर से पारंपरिक छम नृत्य और तांडव प्रस्तुत किया गया था। वे इस नृत्य से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने कलाकारों को दिल्ली आने का न्योता दिया। इसके बाद रारंग के इन कलाकारों ने 26 जनवरी गणतंत्र दिवस परेड में दिल्ली में अपनी अनूठी प्रस्तुति दी थी। तब से यह एक गौरवशाली परंपरा बन चुकी है। मेले के अंतिम दिन तहसील के विभिन्न गांवों से आए लोगों, स्थानीय पंचायत प्रधानों और स्कूली बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

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