हिमाचल की राजधानी शिमला में कमला नेहरू अस्पताल (KNH) से गायनी ओपीडी को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज ( IGMC) शिफ्ट करने के विरोध में अब डॉक्टर भी उतर आए है। IGMC और डेंटल कॉलेज के टीचर संगठन SAMDCOT ने फैसले को एकतरफा, अव्यवहारिक और चिकित्सा व शैक्षणिक मानकों के खिलाफ करार दिया है। SAMDCOT का कहना है कि प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग हमेशा एकीकृत रूप में काम करते है, खासकर शिक्षण संस्थानों में जहां मरीजों की देखभाल और मेडिकल ट्रेनिंग साथ-साथ चलती है। ऐसे में विभाग का विभाजन मरीजों के इलाज और मेडिकल शिक्षा दोनों पर नकारात्मक असर डालेगा। SAMDCOT ने साफ किया कि इस फैसले से इलाज में समन्वय की कमी, देरी और उपचार के स्तर में गिरावट आ सकती है। वहीं मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और प्रशिक्षण भी प्रभावित होगा। 60-60 छात्रों के अलग-अलग सेक्शन बनाने का प्रस्ताव एनएमसी मानकों के अनुरूप नहीं बताया गया है। रोबोटिक सर्जनी के तर्क को किया खारिज रोबोटिक सर्जरी के तर्क को भी एसोसिएशन ने खारिज करते हुए कहा कि यह सुविधा सीमित दिनों के लिए उपलब्ध है और बहुत कम मरीजों को इसकी जरूरत पड़ती है। ऐसे में पूरे विभाग को बांटने का आधार इसे नहीं बनाया जा सकता। SAMDCOT ने यह भी कहा कि KNH में पहले से पर्याप्त ढांचा और विस्तार की योजनाएं मौजूद हैं, इसलिए यह फैसला भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं के विकास के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकता है। SAMDCOT ने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने और OBG विभाग को एकीकृत रखने की मांग की है। सरकार के फैसले से आज भी कई मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी बता दें कि शिमला में 100 साल से भी पुराने KNH अस्पताल से गायनी ओपीडी आईजीएमसी शिफ्ट करने का अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति विरोध कर रही है। इसे लेकर समिति द्वारा कई बार प्रदर्शन किया जा चुका है। गायनी ओपीडी आईजीएमसी को शिफ्ट हो चुकी है। इस वजह से आज भी कुछ मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। ऐसे में जनवादी महिला समिति के बाद डॉक्टर भी सरकार के फैसले के विरोध में उतर आए है।