कांगड़ा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सालय (टांडा मेडिकल कॉलेज) ने हिमाचल प्रदेश का पहला सफल रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट किया है। इस अत्याधुनिक ऑपरेशन के जरिए कुल्लू निवासी 42 वर्षीय अजय को उनकी पत्नी लवली ने अपनी किडनी दान कर नया जीवन दिया है। अस्पताल के सुपर स्पेशलिटी विभाग में नेफ्रोलॉजी, किडनी ट्रांसप्लांट, सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग की संयुक्त टीम ने देर रात 10 बजे तक चले इस जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। कुल्लू निवासी अजय पिछले चार वर्षों से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और लंबे समय तक डायलिसिस पर थे। बीमारी गंभीर होने पर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचा था। कम जोखिम के कारण प्राथमिकता सर्जरी को प्राथमिकता उन्होंने पीजीआई चंडीगढ़ और दिल्ली के मैक्स अस्पताल सहित कई जगहों पर इलाज की तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद वे टांडा मेडिकल कॉलेज पहुंचे, जहां नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अभिनव राणा ने उनकी स्थिति का आकलन किया। डॉ. राणा ने किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. अमित शर्मा और सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों के साथ चर्चा के बाद प्रदेश में पहली बार रोबोटिक तकनीक से ट्रांसप्लांट करने का निर्णय लिया। रोबोटिक सर्जरी को इसकी सटीकता और कम जोखिम के कारण प्राथमिकता दी गई। पति-पत्नी दोनों को सघन चिकित्सा वार्ड में रखा इस सर्जरी को अंजाम देने वाली टीम में डॉ. अभिनव राणा, डॉ. अमित शर्मा के साथ सर्जन डॉ. सोमराज महाजन, डॉ. आशीष शर्मा, डॉ. दीपेश, डॉ. कुशल, डॉ. दिव्यम, डॉ. साक्षी और डॉ. हर्षिता शामिल थे। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. ननीश ने किया, जबकि ट्रांसप्लांट कोआर्डिनेटर नीरज जम्वाल और कल्पना शर्मा ने पूरी प्रक्रिया का समन्वय किया। ऑपरेशन के बाद पति और पत्नी दोनों को सघन चिकित्सा वार्ड में रखा गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। 23 किडनी ट्रांसप्लांट कर चुके हैं डॉक्टर टांडा मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ अब तक कुल 23 किडनी ट्रांसप्लांट कर चुके हैं, लेकिन रोबोटिक विधि से यह पहला प्रयास था। इस सफलता के बाद अब हिमाचल के गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों के लिए चंडीगढ़ या दिल्ली के महंगे निजी अस्पतालों के विकल्प समाप्त हो जाएंगे और टांडा मेडिकल कॉलेज उत्तर भारत में रोबोटिक सर्जरी के एक बड़े केंद्र के रूप में उभरेगा।