हिमाचल प्रदेश में नगर निकाय चुनाव की घोषणा के साथ ही पूरे राज्य के शहरी क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लग गई है। इसके लागू होते ही सरकार और प्रशासन के कामकाज पर कई तरह की पाबंदियां प्रभावी हो गई हैं। अब चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक शासन-प्रशासन को तय नियमों के तहत ही काम करना होगा। इसी के साथ ही मंत्री, विधायक, एडवाइजर, बोर्ड-निगमों के चेयरमैन व वाइस चेयरमैन इत्यादि चुनाव प्रचार में सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में नई योजना, परियोजना की घोषणा, किसी भी योजना के शिलान्यास या उद्घाटन भी नहीं कर सकेगी। सरकारी खर्च पर लोकलुभावन फैसले, नई भर्तियों के विज्ञापन, ट्रांसफर-पोस्टिंग जैसे बड़े प्रशासनिक फैसले बिना इलेक्शन कमीशन की अनुमति के नहीं होंगे। सरकार चुनाव को प्रभावित करने वाले वित्तीय लाभ या अनुदान घोषित नहीं कर सकेगी। नगर पंचायत और नगर परिषद में 19 मई तक और नगर निगम में 31 मई तक आचार संहिता लागू रहेगी। कमीशन के डीसी को सख्ती से पालन के निर्देश राज्य चुनाव आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारी एवं DC को आचार संहिता का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी है। सरकारी भवनों का चुनाव प्रचार के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। अधिकारियों-कर्मचारियों को किसी भी दल या उम्मीदवार के पक्ष में काम नहीं करने की हिदायत दी गई है, ताकि चुनाव बिना भेदभाव और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराए जा सके। सरकार को क्या करना होगा आचार संहिता के बाद सभी सरकारी विभागों को तटस्थ रहकर काम करना होगा। चुनाव आयोग के निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा। वर्तमान में चल रही योजनाएं जारी रह सकती हैं, लेकिन उनमें कोई नया प्रचार या विस्तार नहीं होगा। इसी तरह नई भर्तियों के विज्ञापन भी आचार संहिता हटने तक जारी नहीं होंगे। नगर निकाय चुना लड़ने वाले उम्मीदवारों और दलों के साथ-साथ सरकार भी आचार संहिता के दायरे में होगी। राहत की बात अभी यह है कि ग्रामीण इलाकों में अभी आचार संहिता लागू नहीं है। मगर पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ ही ग्रामीण इलाकों में भी आचार संहिता लागू हो जाएगी।