हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के भरमौर स्थित तुंदा वाइल्डलाइफ सेंचुरी के बड़ाग्रां बीट में एक दुर्लभ सफेद बंदर (एल्बिनो रीसस मकाक) देखा गया है। इस असामान्य दृश्य के सामने आने के बाद वन विभाग ने इसकी जांच शुरू कर दी है। वन विभाग के कर्मचारी ने इस बंदर को कैमरे में कैद किया है, जिसके बाद यह मामला वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, बंदर का सफेद रंग आमतौर पर एल्बिनिज़्म (रंगहीनता) या ल्यूसीज़्म (आंशिक रंग परिवर्तन) जैसी दुर्लभ जैविक स्थितियों के कारण होता है। ऐसे बंदर आमतौर पर अपनी मूल प्रजाति- रीसस मकाक- के साथ ही रहते हैं, जैसा कि इस मामले में भी देखा गया है। डीएफओ कुलदीप जामवाल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह मामला पूर्ण एल्बिनिज़्म का न होकर ल्यूसीज़्म का भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि इसकी सटीक पुष्टि के लिए वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा। चंबा की ‘तुंदा’ में कुछ दिन पहले सफेद बंदर देखा गया था। अब कुगती वाइल्डलाइफ सेंचुरी’ सफेद हिमालयी थार के देखे जाने की भी सूचना है, जो इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाती है। देश में पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले भारत में इससे पहले भी अलग-अलग राज्यों में एल्बिनो या आंशिक रूप से सफेद बंदरों के देखे जाने की खबरें सामने आ चुकी हैं। उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और असम के कुछ वन क्षेत्रों में भी समय-समय पर ऐसे दुर्लभ रीसस मकाक देखे गए हैं। हालांकि, इनकी संख्या बेहद कम होती है और ये प्रकृति में बहुत दुर्लभ माने जाते हैं। दुर्लभ वन्यजीवों की उपस्थिति अच्छा संकेत वन विभाग के अनुसार, इस तरह के दुर्लभ वन्यजीवों की उपस्थिति किसी भी क्षेत्र की स्वस्थ पारिस्थितिकी और समृद्ध जैव विविधता का संकेत होती है। विभाग ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है और इस बंदर के व्यवहार व आवास पर विशेष नजर रखी जा रही है। भरमौर के जंगलों में ऐसे दुर्लभ जीवों का दिखना प्रकृति के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।