हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा कांगड़ा को पर्यटन राजधानी बनाने के प्रयासों के बीच धर्मशाला और मैक्लोडगंज की ऐतिहासिक विरासतें विरोधाभासी तस्वीर पेश कर रही हैं। एक ओर जहां ब्रिटिश शासनकाल की ऐतिहासिक ‘नौरोजी रोड’ सरकारी उपेक्षा के कारण अपना अस्तित्व खो रही है, वहीं उसी कालखंड की एक अन्य महत्वपूर्ण विरासत ‘कैमल हंप रोड’ के जीर्णोद्धार की योजना ने नई उम्मीदें जगाई हैं।
छह करोड़ की लागत से बनेंगा वैकल्पिक मार्ग मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रस्ताव पर धौलाधार की गोद में स्थित लगभग 2.2 किमी लंबे ट्रैक को 6 करोड़ रुपये से ‘जिपेबल रोड’ (वैकल्पिक मार्ग) के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह मार्ग देवदार के घने जंगलों के बीच से गुजरेगा। पूर्व मेयर एवं प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी महासचिव देवेंद्र जग्गी ने बताया कि बीते मानसून के दौरान मुख्य मार्ग बाधित होने पर आपातकालीन स्थिति में इसी मार्ग का सहारा लिया गया था। इसी सामरिक महत्व को देखते हुए प्रशासन इसे एक पक्के वैकल्पिक बाईपास के रूप में तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य मैक्लोडगंज की संकरी सड़कों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से पर्यटकों और स्थानीय लोगों को राहत दिलाना है। 19 वीं सदी के मध्य बनी थी यह सड़क 19वीं सदी के मध्य में विकसित हुई यह सड़क अपनी खास ढलान के लिए जानी जाती थी, जिस पर घोड़े और ऊंट आसानी से चल सकते थे, इसी कारण इसे ‘कैमल हंप’ नाम मिला। सरकार की योजना इसे हेरिटेज और इको-टूरिज्म के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की है। हालांकि, इस नई पहल के बीच ‘नौरोजी रोड’ की बदहाली का मुद्दा अब भी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। पिछले दो दशकों से कई विधायकों और सांसदों ने इस प्राचीन पैदल मार्ग के सौंदर्यीकरण की घोषणाएं की थीं, लेकिन धरातल पर इसका नामोनिशान तक मिट गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिस मार्ग से कभी मैक्लोडगंज से धर्मशाला मात्र 15 मिनट में पहुंच जाते थे, वहां अब चलना भी दूभर है।

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