हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने दो पूर्व चीफ सेक्रेटरी पर लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद, भ्रष्टाचार के प्रति सरकार की जीरो टॉलेंस नीति को लेकर सोशल मीडिया में सवाल उठने लगे हैं। ब्यूरोक्रेसी की लड़ाई को लेकर जब सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू से सवाल किया गया तो उन्होंने सरकार की छवि खराब करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई के बजाय तीनों को संरक्षण की बात कही। सीएम सुक्खू ने कहा कि, मुख्य सचिव संजय गुप्ता और पूर्व मुख्य सचिवों के बीच चल रहा विवाद अधिकारियों की आपसी लड़ाई है। उन्होंने कहा कि उनका संरक्षण किसी एक अधिकारी को नहीं बल्कि तीनों अधिकारियों को है। सीएम ने यह भी साफ किया कि प्रबोध सक्सेना को उनके कार्यकाल के अच्छे काम की वजह से सेवा विस्तार दिया गया है। यह सरकार का प्ररोगेटिव रहता है। वह इस पूरे मामले पर सभी पक्षों से बातचीत कर स्थिति स्पष्ट करेंगे। संजय गुप्ता ने पूर्व अधिकारियों पर लगाए थे गंभीर आरोप बता दें कि, संजय गुप्ता ने बीते मंगलवार को मीडिया से बातचीत में पूर्व मुख्य सचिव आरडी धीमान और प्रबोध सक्सेना पर गंभीर आरोप लगाए थे। गुप्ता ने कहा कि दोनों पूर्व मुख्य सचिव उन्हें सेवा विस्तार या नई नियुक्ति से रोकने के लिए साजिश कर रहे हैं। भूमि खरीद विवाद में दी सफाई चेस्टर हिल भूमि खरीद मामले पर सफाई देते हुए गुप्ता ने कहा कि जमीन खरीद के समय वह मुख्य सचिव नहीं थे। उन्होंने जो जमीन खरीदी है, वह सरकार से अनुमति लेने के बाद ली है। उन्होंने बताया कि जमीन खरीद के लिए ₹75 लाख उन्होंने जीपीएफ से निकाले थे। गुप्ता ने खुद को किसी गुट से अलग बताते हुए कहा कि वह सीधे मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करते हैं। साथ ही उन्होंने दोनों पूर्व अधिकारियों की निष्ठा पर सवाल उठाते हुए उन पर विभिन्न जांच एजेंसियों के मामलों में उलझे होने के आरोप लगाए। गुप्ता ने श्रीकांत बाल्दी को भी लपेटा यही नहीं, संजय गुप्ता ने रेरा के पूर्व चेयरमैन श्रीकांत बाल्दी को भी लपेटा। उन्होंने कहा कि, जिस चेस्टर हिल का विवाद चल रहा है, वहां निर्माण की मंजूरी श्रीकांत बाल्दी ने दी है। उन्होंने एडवोकेट विनय शर्मा की शिकायत को निराधार बताया और इसके पीछे आरडी धीमान और प्रबोध सक्सेना के शामिल होने की बात कही। सक्सेना के ओडीआई केस में ऊर्जा सचिव से रिपोर्ट तलब: गुप्ता संजय गुप्ता ने कहा, मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद प्रबोध सक्सेना से जुड़े ओडीआई (ऑफिसर ऑफ डाउटफुल इंटेग्रिटी) मामले में ऊर्जा सचिव राकेश कंवर से रिपोर्ट तलब की गई है। गुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित जमीन उन्होंने ₹1.38 करोड़ में खरीदी, जबकि उसका कलेक्टर रेट ₹1.10 करोड़ था, और इस संबंध में आवश्यक दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं।