हिमाचल प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता और पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा विधानसभा में पेश चौथे बजट की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इस बजट को पूरी तरह दिशाहीन, जनविरोधी और खोखले वादों का पुलिंदा बताया। राणा ने कहा कि यह बजट प्रदेश की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने में विफल रहा और इसमें विकास का कोई स्पष्ट दृष्टिकोण नजर नहीं आता। बजट में वादों को नहीं मिली कोई झलक राणा ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने चुनावों के दौरान बड़े-बड़े वादे करके जनता को गुमराह किया था, लेकिन बजट में उन वादों की झलक तक नहीं मिली। उन्होंने विशेष रूप से 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को हर महीने ₹1500 देने के वादे का जिक्र किया। उनके अनुसार, इस योजना के तहत न तो सभी महिलाओं को तुरंत ₹1500 देने और न ही पिछले 3 साल का बकाया एरियर देने की कोई घोषणा की गई है, और न ही इसके लिए बजट में कोई प्रावधान रखा गया है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार अपने ही वादों से पीछे हट रही है। बजट आम आदमी की जेब पर बोझ डालने वाला उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह बजट आम आदमी की जेब पर बोझ डालने वाला है, जबकि राहत देने के नाम पर केवल दिखावटी घोषणाएं की गई हैं। बेरोजगार युवाओं के लिए सरकार की कोई ठोस नीति सामने नहीं आई है। राणा ने कहा, “प्रदेश का युवा रोजगार की उम्मीद में बैठा था, लेकिन सरकार ने उन्हें निराश करने का काम किया है।” किसानों और बागवानों के मुद्दे पर भी घेरा किसानों और बागवानों के मुद्दे पर भी राजेंद्र राणा ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि बजट में इन वर्गों के लिए कोई ठोस राहत या दीर्घकालिक योजना दिखाई नहीं देती। राणा के अनुसार, कृषि और बागवानी प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन सरकार ने इन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। उन्होंने इसे केवल आंकड़ों और शब्दों का खेल बताया। राजेंद्र राणा ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि यह बजट महिलाओं, युवाओं, किसानों, बागवानों और आम नागरिक सहित हर वर्ग को निराश करने वाला है। उन्होंने कहा कि जनता आने वाले समय में इसका जवाब जरूर देगी।