भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के सवा तीन वर्षों के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश कानून व्यवस्था, वित्त और प्रशासन तीनों मोर्चों पर विफल रहा है, जिससे राज्य कर्ज और अव्यवस्था में धकेल दिया गया है। डॉ. बिंदल ने कहा कि प्रदेश में हत्या, लूट, फिरौती, डकैती और नशे से संबंधित घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है। खनन और वन माफिया की सक्रियता से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है। कांगड़ा, चंबा, मंडी और सोलन जैसे जिलों में अवैध खनन और वन कटान प्रशासनिक कमजोरी का स्पष्ट प्रमाण है। वन अधिकारियों पर हुए हमलों ने कानून के प्रति भय समाप्त होने की स्थिति को दर्शाया है। सरकार ने कर्ज बढ़ाने की नीति अपनाई : बिंदल शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने संसाधन बढ़ाने के बजाय कर्ज बढ़ाने की नीति अपनाई है। सलाहकारों, ओएसडी (विशेष कर्तव्य अधिकारी) और अन्य विशेष पदों पर लगभग 70-75 नियुक्तियां की गई हैं, जिन पर वेतन, वाहन और अन्य सुविधाओं के रूप में करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। मुख्य संसदीय सचिवों (CPS) की अवैध नियुक्तियों पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद पद तो समाप्त हो गए, लेकिन तब तक राज्य पर भारी वित्तीय बोझ पड़ चुका था और अब सुप्रीम कोर्ट में महंगे वकीलों पर खर्च हो रहा है। मित्रों की सरकार करार दिया डॉ. बिंदल ने निगमों और बोर्डों में चेयरमैन तथा वाइस चेयरमैन की बढ़ती संख्या को “मित्रों की सरकार” बताया। उन्होंने सरकारी प्रचार, बड़े काफिलों, नई गाड़ियों की खरीद और हेलीकॉप्टर के उपयोग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि चुनावी गारंटियां, जैसे ₹1500 मासिक सहायता, मुफ्त बिजली और एक लाख नौकरियां, बिना किसी वित्तीय आकलन के घोषित की गई थीं। इसका खामियाजा कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA), पेंशन और विभिन्न सामाजिक योजनाओं में देरी के रूप में जनता को भुगतना पड़ रहा है। भाजपा अध्यक्ष ने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र सरकार से टैक्स डिवोल्यूशन और विकास योजनाओं के लिए पहले से अधिक सहायता मिल रही है, फिर भी राज्य सरकार अपने संसाधनों से बड़े प्रोजेक्ट शुरू करने में विफल रही है। अंत में, डॉ. बिंदल ने कहा कि इस वित्तीय अव्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की है और भाजपा जनहित में इन मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी।