हिमाचल प्रदेश में राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान रिज पर प्रस्तुत एक नाटक (स्किट) को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शिमला के पूर्व डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवार ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत नाटक को कथित तौर पर कश्मीरी मुस्लिमों के खिलाफ बताया। उन्होंने इसे लेकर राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को शिकायत भेजी है। टिकेंद्र पंवार ने कहा- यह सांप्रदायिक, भ्रामक और संविधान की भावना के विरुद्ध है। उन्होंने मांग की कि यह जांच की जाए कि इस तरह की विभाजनकारी स्क्रिप्ट कैसे लिखी गई, किसने इसे मंजूरी दी और इसे गणतंत्र दिवस समारोह में कैसे मंचित किया गया। उन्होंने इस चूक के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है। गणतंत्र दिवस पर पुलिस ने चिट्टा के खिलाफ पेश किया नाटक दरअसल, गणतंत्र दिवस राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान शिमला के रिज पर ‘एकलव्य कला मंच हिमाचल प्रदेश पुलिस प्रथम वाहिनी बनगढ़’ द्वारा ‘चिट्टा’ के खिलाफ जागरूकता के लिए एक नाटक पेश किया गया। इसमें कुछ कलाकारों को लाहौर में बैठकर भारतीय युवाओं को चिट्टे का आदी बनाने की साजिश रचते हुए दिखाया गया। हालांकि, स्किट में स्थान लाहौर बोला गया, लेकिन पंवार का आरोप है कि उसमें दिखाए गए पात्रों की वेशभूषा (पोशाक) और भाषा कश्मीरी मुसलमानों जैसी थी, जिससे एक खास समुदाय को निशाना बनाया गया। नशा तस्करी किसी धर्म या समुदाय से जुड़ी नहीं: पंवार टिकेंद्र पंवार ने कहा- नशा तस्करी किसी धर्म या समुदाय से जुड़ी नहीं होती। इसमें समाज के हर वर्ग के लोग शामिल हो सकते हैं और इसके शिकार भी सभी वर्गों के लोग होते हैं। उन्होंने कहा- इस तरह की प्रस्तुति से किसी एक समुदाय के खिलाफ नफरत फैलने का खतरा है और यह कानूनी कार्रवाई के दायरे में आता है। पुलिस बोली- किसी को बदनाम करने का इरादा नहीं वहीं पुलिस विभाग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। पुलिस प्रवक्ता के अनुसार- स्किट का उद्देश्य केवल युवाओं को चिट्टे के खतरे के प्रति जागरूक करना है। किसी भी समुदाय को बदनाम करने का इरादा नहीं था। स्किट की शुरुआत में ही लाहौर का उल्लेख किया गया था, जिससे यह स्पष्ट है कि चिट्टे के स्रोत के रूप में पाकिस्तान को दर्शाया गया। हम यह दिखाना चाहते थे कि पाकिस्तान देश के युवाओं को नशे का आदी बनाकर निशाना बना रहा है।

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