हिमाचल प्रदेश की दूसरी राजधानी धर्मशाला की सियासत में उस समय उबाल आ गया, जब स्थानीय विधायक सुधीर शर्मा ने नगर निगम (MC) कमिश्नर के खिलाफ ‘विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव’ लाने की बड़ी घोषणा की। विधायक ने प्रशासनिक मशीनरी पर सत्तापक्ष के राजनीतिक लाभ के लिए लोकतांत्रिक मर्यादाओं और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का सरेआम उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगाया है। विधायक सुधीर शर्मा की इस घोषणा और तीखे हमलों के बाद धर्मशाला के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। माना जा रहा है कि विधानसभा के आगामी सत्र में यह मुद्दा गरमा सकता है, जिससे सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ेगा। एमएलए फंड से हुआ था काम, किया था शिलान्यास विधायक सुधीर शर्मा ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि शहर के फव्वारा चौक पर एक विशेष विकास परियोजना के लिए उन्होंने अपनी विधायक निधि (MLA Fund) से धनराशि स्वीकृत की थी। नियमानुसार, इस परियोजना का आधिकारिक शिलान्यास भी स्वयं उनके द्वारा किया गया था। दुर्भावना के चलते हटाई शिलान्यास पट्टिका आरोप है कि बाद में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दुर्भावनापूर्ण तरीके से वहां से विधायक के नाम की शिलान्यास पट्टिका को हटा दिया गया। इसके उपरांत, उसी परियोजना का मुख्यमंत्री से दोबारा उद्घाटन कराया गया। सुधीर शर्मा ने इसे पूरी तरह राजनीतिक लाभ लेने का घटिया प्रयास बताते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर एक चुने हुए जनप्रतिनिधि के अधिकारों का हनन और लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान है। विवादों के घेरे में कमिश्नर की कार्यप्रणाली; उठाए कई गंभीर सवाल विधायक सुधीर शर्मा यहीं नहीं रुके, उन्होंने नगर निगम कमिश्नर की कार्यप्रणाली और उनके पिछले रिकॉर्ड को लेकर भी तीखे सवाल दागे। उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त अधिकारी पहले से ही कई तरह के प्रशासनिक विवादों और अनियमितताओं के घेरे में हैं। अधिकारी पर आरोप- विधायक बोले विवादों हैं अधिकारी सरकारी आवास पर फिजूलखर्ची: अधिकारी पर अपने सरकारी आवास के रख-रखाव और साज-सज्जा पर नियमों को ताक पर रखकर लाखों रुपये उड़ाने के आरोप हैं। विकास कार्यों में बाधा: शहर के डंपिंग साइट से जुड़े महत्वपूर्ण और जनहित के कार्यों को जानबूझकर रोकने का आरोप। स्मार्ट सिटी फंड्स पर सवाल: धर्मशाला स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मिलने वाले करोड़ों रुपये के फंड्स के उपयोग और प्रबंधन को लेकर भी अधिकारी की भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। “विफलताओं के बावजूद अधिकारी को सरकार का संरक्षण” सुधीर शर्मा ने प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इतने बड़े विवादों, वित्तीय विसंगतियों और स्पष्ट प्रशासनिक विफलताओं के बावजूद सरकार द्वारा ऐसे दागी अधिकारी को लगातार संरक्षण दिया जा रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।

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