मंडी जिले की लडभड़ोल तहसील का एकमात्र सिविल अस्पताल इन दिनों खुद ‘बीमार’ नजर आ रहा है। डॉक्टरों की भारी कमी और बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के चलते स्थानीय जनता में भारी रोष है। ताजा मामला शुक्रवार रात का है, जब एक जिला परिषद सदस्य की बुजुर्ग माता को आपात स्थिति में अस्पताल लाने के बावजूद डॉक्टर नहीं मिल सका। आधी रात को अस्पताल में हंगामा: ‘ऑन कॉल’ रहे डॉक्टर चौबीन वार्ड के जिला परिषद सदस्य सुरेंद्र राणा ने बताया कि शुक्रवार रात करीब 10:30 बजे उनकी 75 वर्षीय माता शिवजु देवी को पेट में गंभीर दर्द हुआ। जब वे उन्हें लेकर सिविल अस्पताल लडभड़ोल पहुंचे, तो वहां ड्यूटी पर केवल नर्सिंग स्टाफ तैनात था। सुरेंद्र राणा का आरोप है कि कोई भी डॉक्टर अस्पताल परिसर में मौजूद नहीं था। स्टाफ नर्स ने उन्हें बताया कि डॉक्टर ‘ऑन कॉल’ हैं, यानी बुलाने पर ही आएंगे। आपातकालीन स्थिति में समय पर उपचार न मिलने के कारण मरीज की जान पर बन आई थी। सरकारी दावों की खुली पोल: 7 में से 4 पद खाली लडभड़ोल क्षेत्र की लगभग 20 पंचायतों और 25 हजार की आबादी के लिए यह अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं का एकमात्र सहारा है। अस्पताल की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ डॉक्टरों के 7 स्वीकृत पदों में से 4 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। वर्तमान में मात्र 3 डॉक्टरों के भरोसे पूरी तहसील की स्वास्थ्य व्यवस्था टिकी है। जिप सदस्य सुरेंद्र राणा ने प्रदेश सरकार के ‘बेहतर स्वास्थ्य सेवा’ के दावों को खोखला बताते हुए कहा कि जब एक जन-प्रतिनिधि के परिवार को यह दिन देखना पड़ रहा है, तो आम जनता का क्या हाल होता होगा। प्रशासनिक प्रतिक्रिया: CMO ने दिए जांच के निर्देश इस मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए सीएमओ मंडी, डॉ. दिपाली शर्मा ने कहा कि वर्तमान में अस्पताल में तीन डॉक्टर कार्यरत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि रात्रि सेवाओं के दौरान डॉक्टर की अनुपस्थिति का मामला गंभीर है। इस संबंध में संबंधित डॉक्टर से जवाब-तलबी की जाएगी और भविष्य में रात्रि सेवाओं को सुचारू बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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