हिमाचल के धर्मशाला के योल कैंप के अंतर्गत आने वाले बनोरडू गांव में स्थित त्रिलोचन महादेव ग्राम सुधार सभा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। सभा के पदाधिकारियों पर सरकारी धन के गबन, जाली हस्ताक्षर और फर्जी बिलिंग के जरिए लाखों रुपये ठिकाने लगाने के आरोप लगे हैं। इस घोटाले के उजागर होने के बाद ग्रामीणों में भारी रोष है और उन्होंने उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई है। सभा बनी ‘पारिवारिक लिमिटेड कंपनी’ ग्रामीणों ने सभा के अध्यक्ष ओम प्रकाश पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ताक पर रखने का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार ओम प्रकाश ने खुद को अध्यक्ष, अपने बेटे को सचिव और पत्नी मीना को सदस्य बनाकर सभा का नियंत्रण अपने परिवार के हाथों में ले लिया। आरोप है कि बिना किसी आमसभा (General Body Meeting) या सदस्यों की अनुमति के, सभा के खाते से सरकारी राशि निकालकर निजी खातों में ट्रांसफर की गई। जांच में चौंकाने वाले खुलासे जब एसडीएम धर्मशाला के पास यह मामला पहुंचा और रिकॉर्ड की जांच की गई, तो कई अनियमितताएं सामने आईं: उपाध्यक्ष के ‘फर्जी हस्ताक्षरों’ से मचा हड़कंप इस मामले में सबसे सनसनीखेज खुलासा सभा के उपाध्यक्ष पंडित सतीश शर्मा ने किया है। उन्होंने लिखित बयान जारी कर बताया कि रिकॉर्ड में उनके नाम के आगे जो भी हस्ताक्षर किए गए हैं, वे पूरी तरह से फर्जी हैं। उन्होंने कभी उन दस्तावेजों पर साइन नहीं किए। फाइलों में दबी कार्रवाई, ग्रामीणों में रोष मुख्य शिकायतकर्ता उपेंद्र जम्वाल और देव शर्मा भट्ट का कहना है कि वे पिछले छह महीनों से न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन मामला वन विभाग, पुलिस, विजिलेंस और राजस्व विभाग की फाइलों में ही अटका हुआ है। ग्रामीणों ने पंचायती राज विभाग और बीडीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और गबन की गई राशि की वसूली नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।