हिमाचल सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। सीएम ने वित्त मंत्री के सामने वित्तीय मसले उठाए। उन्होंने हिमाचल के 5500 करोड़ रुपए के सेब उद्योग को बचाने के लिए सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 100 प्रतिशत करने की मांग की है। दरअसल, केंद्र सरकार ने हाल ही में न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत की है। इससे हिमाचल का सेब उद्योग नष्ट हो जाएगा और राज्य के ढाई लाख से ज्यादा बागवान परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट आ जाएगा। सीएम ने न्यूजीलैंड से साथ किया गया मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) रद्द करने की मांग की। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को बताया कि बागवानों के प्रतिनिधिमंडल ने इसे लेकर चिंता जाहिर की है। कर्ज सीमा 2% बढ़ाने का आग्रह किया इसके अलावा सीएम ने 16वें वित्त आयोग में हर साल कम से कम 10 हजार करोड़ रुपए देने और कर्ज लेने की सीमा राज्य को राज्य सकल घरेलू उत्पाद (SGDP) का 2 प्रतिशत बढ़ाने का आग्रह किया। सीएम ने पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा हिमाचल के लिए घोषित 1500 करोड़ रुपए का आपदा राहत पैकेज जल्द जारी करने की मांग की। पीएम मोदी ने 9 सितंबर को हिमाचल दौरे के दौरान इसकी घोषणा की थी। मगर स्पेशल पैकेज में से हिमाचल को अब तक एक पैसा भी नहीं मिल पाया। उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया। 16वें वित्त आयोग में ग्रांट बढ़ाने का अनुरोध सीएम ने वित्त मंत्री को 16वें वित्त आयोग को सौंपे गए ज्ञापन जानकारी दी। उन्होंने अनुरोध किया कि राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को न्यूनतम 10 हजार करोड़ रुपए प्रतिवर्ष सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने 16वें वित्त आयोग के पुरस्कार काल के दौरान राज्यों की आय एवं व्यय के यथार्थपरक आकलन के आधार पर राजस्व घाटा अनुदान तय करने पर बल दिया। पहाड़ी राज्यों के लिए ग्रीन फंड देने की पैरवी सीएम सुक्खू ने पहाड़ी राज्यों के लिए एक अलग ‘ग्रीन फंड’ के गठन की जोरदार पैरवी करते हुए कहा कि उत्तर भारत के ‘ग्रीन फ्रंटियर’ और ‘लंग्स’ के रूप में पहाड़ी राज्य महत्वपूर्ण पारिस्थितिकीय सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने इसके लिए 50 हजार करोड़ रुपए के वार्षिक प्रावधान के साथ विशेष ग्रीन फंड बनाने का प्रस्ताव रखा। पहाड़ी राज्यों में आपदा के बाद भरपाई को नियम अलग बनाए जाए:CM सीएम ने 15वें वित्त आयोग द्वारा विकसित डिजास्टर रिस्क इंडेक्स को पुनः निर्धारित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की तुलना देश के अन्य हिस्सों से नहीं की जा सकती। भारी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के बावजूद राज्य को आपदा राहत के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने पहाड़ी राज्यों के लिए अलग डिजास्टर रिस्क इंडेक्स तथा विशेष आवंटन की मांग की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर तथा राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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