हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर उपमंडल में प्रशासन ने शीतकाल के दौरान पर्यावरण संरक्षण और जन-सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कड़ा रुख अपनाया है। एसडीएम (SDM) रामपुर हर्ष अमरेंद्र सिंह ने क्षेत्र में बागानों और खेतों के अवशेष (टहनियां, झाड़ियां, पत्तियां) जलाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। जंगलों और संपत्ति को आगजनी का खतरा प्रशासन के अनुसार, सर्दियों के मौसम में अक्सर बागवान अपने बगीचों की सफाई के बाद अवशेषों को एक जगह इकट्ठा कर जला देते हैं। वर्तमान में शुष्क मौसम के कारण इन छोटी घटनाओं से भयानक आग लगने का खतरा बना रहता है, जो न केवल निजी संपत्ति और बागानों को नुकसान पहुँचा सकती है, बल्कि समीपवर्ती वनों (Forests) को भी राख कर सकती है। कानूनी कार्रवाई की चेतावनी एसडीएम हर्ष अमरेंद्र सिंह ने पंचायत प्रतिनिधियों को पत्र जारी कर ग्रामीणों को जागरूक करने का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि इन आदेशों की अवहेलना करने वालों के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 152 और अन्य प्रासंगिक पर्यावरण कानूनों के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। वायु प्रदूषण और जनहित में उठाया कदम खुले में आग जलाने से न केवल आगजनी का खतरा बढ़ता है, बल्कि इससे वायु की गुणवत्ता भी खराब होती है, जिससे सार्वजनिक उपद्रव (Public Nuisance) की स्थिति उत्पन्न होती है। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे अवशेषों के निस्तारण के लिए पर्यावरण अनुकूल विकल्प जैसे खाद बनाना (Composting) या मल्चिंग अपनाएं।

Spread the love