हिमाचल प्रदेश के शिमला में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने रिकॉर्ड समय में शिमला बाइपास की टनल-4 के दोनों सिरों को आपस में जोड़ दिया है। यह उपलब्धि साल के आखिरी दिन हासिल हुई, जिससे शिमला बाइपास परियोजना के काम में तेजी आएगी। इससे एक सप्ताह पहले, 23 दिसंबर को टनल-5 के सिरे भी जोड़े गए थे। टनल-4 की कुल लंबाई 410 मीटर है। इसका निर्माण मात्र नौ महीनों के रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया है। इस टनल के निर्माण में न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) का उपयोग किया गया है, जिसे वर्तमान में सबसे प्रभावी टनलिंग विधि माना जाता है। 31 दिसंबर को टनल के सिरे जुड़ने के दौरान एनएचएआई के पीआईयू शिमला के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आनंद कुमार, भारत कंस्ट्रक्शन के एमडी राजीव गर्ग और फील्ड के सभी कर्मचारी मौजूद रहे। 27.457 किलोमीटर लंबी है बाइपास परियोजना एनएचएआई की शिमला बाइपास परियोजना 27.457 किलोमीटर लंबी है और यह चंडीगढ़-शिमला कॉरिडोर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस परियोजना में कुल पांच सुरंग शामिल हैं। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य जनता की यात्रा को तेज और अधिक सुविधाजनक बनाना है। शिमला बाइपास के निर्माण से शहर में ट्रैफिक जाम कम होगा और शिमला (ढली) पहुंचने में लगने वाला समय लगभग एक घंटे कम हो जाएगा। यह परियोजना पर्यटन को बढ़ावा देगी और ऊपरी शिमला का रुख करने वाले स्थानीय लोगों तथा पर्यटकों को भी सुविधा प्रदान करेगी। इसके अतिरिक्त, सेब सीजन के दौरान बागवानों को अपना सेब शिमला और बाहरी मंडियों तक आसानी से पहुंचाने में मदद मिलेगी।