हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा वैली कार्निवाल 2025 के दौरान नशे के खिलाफ जन-जागरूकता का एक महत्वपूर्ण आयोजन हुआ। इसमें 2500 से अधिक महिलाओं ने कांगड़ा के पारंपरिक झमाकड़ा नृत्य के माध्यम से ‘एंटी-चिट्टा’ का सशक्त सामाजिक संदेश दिया। ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ महिलाओं ने यह स्पष्ट किया कि नशे के विरुद्ध लड़ाई में समाज की आधी आबादी पूरी दृढ़ता से खड़ी है। केवल लोकसंस्कृति को मंच प्रदान किया कार्निवाल के तहत आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुति ने न केवल लोकसंस्कृति को मंच प्रदान किया, बल्कि सामाजिक सरोकारों को भी प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाया। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं का यह सामूहिक झमाकड़ा नृत्य दर्शकों के लिए प्रेरणादायी रहा। हिमाचली रंगों में रंगा पूरा पंडाल इसी क्रम में कांगड़ा वैली कार्निवाल में एक विशाल नाटी कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस आयोजन में एक हजार से अधिक महिलाओं ने एक साथ नाटी नृत्य प्रस्तुत किया। यह प्रस्तुति कांगड़ा घाटी की समृद्ध लोकसंस्कृति, सामूहिक सहभागिता और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बनी। पूरा पंडाल हिमाचली संस्कृति के रंगों में रंग गया। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना इस अवसर पर उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने महिलाओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन लोकसंस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक चेतना और महिला सशक्तिकरण को मजबूती देते हैं। बैरवा ने यह भी बताया कि कांगड़ा वैली कार्निवाल अब केवल मनोरंजन का उत्सव नहीं, बल्कि नशे के खिलाफ जनआंदोलन और सामाजिक एकता का सशक्त मंच बन चुका है। संस्कृति को सकारात्मक दिशा देना उद्देश्य कार्यक्रम में विभिन्न स्वयं सहायता समूहों, महिला मंडलों और ग्रामीण क्षेत्रों से आई महिलाओं ने उल्लेखनीय भागीदारी की। आयोजकों के अनुसार, झमाकड़ा और विशाल नाटी जैसे आयोजनों का उद्देश्य संस्कृति को जीवंत रखते हुए समाज को सकारात्मक दिशा देना है।

Spread the love