संस्कृति मंत्रालय ने बताया कि जवाहरलाल नेहरू के पत्र ‘लापता’ नहीं हैं। सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि चूंकि इन दस्तावेजों का ठिकाना मालूम है, इसलिए इन्हें ‘लापता’ नहीं कहा जा सकता। 

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