भारतीय महिला क्रिकेट टीम की तेज गेंदबाज रेणुका ठाकुर को हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा एक करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि देने की घोषणा ने प्रदेश के खेल जगत में ‘सौतेला व्यवहार’ का विवाद खड़ा कर दिया है। कुल्लू की खो-खो विश्व कप विजेता नीता राणा को समान सम्मान न दिए जाने पर सोशल मीडिया पर आक्रोश है। जिसके बाद उनके लिए भी एक करोड़ रुपए की सम्मान राशि की मांग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने महिला क्रिकेट विश्व कप में शानदार प्रदर्शन के लिए रेणुका ठाकुर को 1 करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद से ही यह सवाल उठने लगे हैं कि जब एक क्रिकेट खिलाड़ी को इतना बड़ा इनाम दिया गया, तो पहले अंतरराष्ट्रीय खो-खो विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम की सदस्य नीता राणा को समान सम्मान क्यों नहीं दिया गया। नीता राणा ने भी खो-खो विश्व कप में देश का मान बढ़ाया इस बहस को सबसे पहले कुल्लू की खराहल घाटी के युवा एवं खेल प्रेमी राकेश राणा ने मुखर किया। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि रेणुका ठाकुर ने प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है, लेकिन नीता राणा ने भी खो-खो विश्व कप में देश का मान बढ़ाया है। राकेश राणा ने मांग की कि जब रेणुका ठाकुर को एक करोड़ रुपए दिए गए, तो कुल्लू की बेटी के साथ सौतेला व्यवहार क्यों? उन्होंने कहा कि नीता राणा ने ‘मिट्टी से लेकर मैट तक’ का लंबा और संघर्षपूर्ण सफर तय किया है। इसलिए सरकार को इस ‘ट्रोल’ से बचने के लिए नीता राणा को भी एक करोड़ रुपए की घोषणा करनी चाहिए। गौरतलब है कि खो-खो संघ के अध्यक्ष ने भी पहले नीता राणा को नौकरी और प्रोत्साहन राशि देने की जोरदार सिफारिश की थी। अब इस मामले पर सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है। नीता राणा को उचित सम्मान दिलाने की मांग यह सामने आया है कि खो-खो विश्व कप की ऐतिहासिक जीत के बाद, हिमाचल प्रदेश खो-खो संघ ने भी नीता राणा को उचित सम्मान दिलाने के लिए सरकार से सिफारिश की थी। नीता राणा के सम्मान समारोह में हिमाचल प्रदेश खो-खो संघ के अध्यक्ष अभिषेक ठाकुर ने स्पष्ट बयान दिया था कि “वह (खो-खो संघ) जल्द ही मुख्यमंत्री, खेल मंत्री और सचिव युवा सेवा एवं खेल विभाग से मिलकर नीता राणा को सरकार की तरफ से प्रोत्साहन राशि एवं सरकारी नौकरी दिलवाने की सिफारिश करेंगे।” खो-खो संघ के अध्यक्ष के इस बयान और सिफारिश के बावजूद, नीता राणा के लिए क्रिकेट खिलाड़ी के समान सम्मान राशि की घोषणा न होने से सरकार की खेल नीति पर सवालिया निशान लग गया है। अब सरकार पर टिकी निगाहें सरकार के सामने अब यह स्पष्ट चुनौती है कि वह दो विश्व विजेता बेटियों को समान सम्मान देकर, खेलों के बीच हो रहे कथित भेदभाव के आरोपों को कैसे समाप्त करती है। जनभावना और खो-खो संघ की सिफारिशों के बीच, सरकार का फैसला अन्य खेलों के खिलाड़ियों के मनोबल पर भी सीधा असर डालेगा।