राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने धर्मशाला में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जनजातीय कल्याण योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से नियमित रूप से जनजातीय क्षेत्रों का दौरा कर योजनाओं की स्थिति का निरीक्षण करने को कहा। यह निर्देश बुधवार को उपायुक्त कार्यालय सभागार में हुई समीक्षा बैठक में दिए गए। डॉ. लकड़ा ने शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया। उन्होंने जनजातीय इलाकों में बच्चों को बेहतर शिक्षा सुविधाएं सुनिश्चित करने और स्कूल न जाने वाले बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए अभियान चलाने का निर्देश दिया, ताकि ड्रॉप आउट दर कम हो। उन्होंने नए आंगनबाड़ी केंद्र खोलने और जनजातीय छात्रावासों की संख्या बढ़ाने की बात भी कही। उपमंडल स्तर पर लगाए जाएं स्वास्थ्य शिविर स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए, उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उपमंडल स्तर पर नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में इलाज की सुविधा को सुलभ बनाना है। आवास योजनाओं के तहत बनने वाले घरों का अधिकारियों को मौके पर जाकर निरीक्षण करने और यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि लाभ केवल पात्र परिवारों को मिले। बैठक में जनजातीय युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार प्रशिक्षण देने और रोजगार मेले आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए। औद्योगिक क्षेत्रों में जनजातीय युवाओं को नौकरी और स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ने के लिए कदम उठाने पर भी चर्चा हुई। पशुधन सुरक्षा के लिए उठाए जाएं कदम : लकड़ा डॉ. लकड़ा ने भेड़-बकरी पालकों को स्थानीय प्रजातियों के संवर्धन को प्राथमिकता देने की सलाह दी और पशुधन की सुरक्षा तथा उनके लिए आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा। बड़ा भंगाल जैसे दुर्गम इलाकों में नेटवर्क सुविधा बहाल करने के लिए बीएसएनएल अधिकारियों को निर्देश दिए गए। आयोग की सदस्य ने स्वर्ण जयंती आश्रय योजना, शिक्षा, बिजली, पेयजल, कृषि-बागवानी, वन अधिकार अधिनियम और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़ी योजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने सभी अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट सात दिनों के भीतर आयोग को भेजने का निर्देश दिया।

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