हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के रिकांगपिओ में सामुदायिक संस्कृति एवं संरक्षण विषय पर आधारित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वार्ता सम्मेलन का सफल समापन हुआ। समापन समारोह में राज्य के राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने बदलते समय में पारंपरिक संस्कृति, खानपान, पहनावे और रीति-रिवाजों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी समृद्ध विरासत से जुड़ी रह सके। इस अवसर पर ठाकुर सेन नेगी राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य उत्तम चंद चौहान ने मंत्री सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के उप-कुलपति प्रो. महावीर सिंह, एसडीएम कल्पा, डॉ. पूनम मेहता (प्राचार्य, एलबीएस महाविद्यालय), डॉ. पंकज बसोटिआ (प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय रामपुर) सहित कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। सभी को पारंपरिक किन्नौरी टोपी, खतक और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। शोध पत्र प्रस्तुत किए गए सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वानों ने भाग लिया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की डॉ. गीता नेगी, एमोरी विश्वविद्यालय (जॉर्जिया, अमेरिका) के डॉ. लोबसन तांज़ीन नेगी, और जेएनयू, नई दिल्ली के डॉ. मिलाप चंद शर्मा ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से विचार साझा किए। सम्मेलन के दौरान संस्कृति के विविध पहलुओं पर आधारित शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इस तीन दिवसीय आयोजन में ऑफलाइन और ऑनलाइन माध्यम से शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इन प्रतिभागियों में डॉ. पूनम मेहता, प्रो. जनक नेगी, कुशाल शर्मा, बालम नेगी, डॉ. ज्ञान चंद शर्मा, डॉ. शीला नेगी, प्रो. कपूर चंद, धर्मकीर्ति नेगी, और अन्य अनेक शोधकर्ता व अध्यापक शामिल रहे। अंत में डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर एवं सह-समन्वयक प्रो. जनक नेगी ने इस सम्मेलन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजकों का आभार प्रकट किया। सम्मेलन ने क्षेत्रीय संस्कृति के संरक्षण को लेकर एक सार्थक मंच प्रदान किया और स्थानीय से लेकर वैश्विक स्तर तक चिंतन का अवसर उपलब्ध कराया।

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