हिमाचल प्रदेश से हाल में निर्वाचित राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा के चुनाव को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इस मामले में हाईकोर्ट के अधिवक्ता विनय शर्मा ने जनहित याचिका (PIL) दायर की है। विनय शर्मा ने बताया कि उनकी याचिका पर हाईकोर्ट ने आज इस संदर्भ में इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया, केंद्र सरकार, राज्य सरकार, रिटर्निंग ऑफिसर और स्वयं अनुराग शर्मा को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया और जस्टिस बीसी नेगी की बैंच ने सभी प्रतिवादियों को 21 मई तक जवाब दायर करने के आदेश जारी किए। याचिका में आरोप लगाया गया कि अनुराग शर्मा ने नामांकन दाखिल करते समय सरकार के साथ अपने ठेके (कॉन्ट्रैक्ट) जारी रखे हुए थे, जिसके चलते वे चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य थे। याचिकाकर्ता ने रीप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट 1951 की धारा 9A का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी प्रत्याशी का नामांकन के समय सरकार के साथ कोई सक्रिय कॉन्ट्रैक्ट होता है, तो उसकी उम्मीदवारी अवैध मानी जाती है। नामांकन के वक्त सात कॉन्ट्रैक्ट सक्रिय होने का दावा याचिका में यह दावा किया गया कि नामांकन के दौरान अनुराग शर्मा के सात कॉन्ट्रैक्ट सक्रिय थे, बावजूद इसके रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन की ठीक से जांच नहीं की और उसे स्वीकार कर लिया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से चुनाव को अवैध घोषित करने की प्रार्थना की है। कानून के तहत अयोग्यता का मामला- विनय याचिकाकर्ता विनय का कहना है कि यदि यह साबित हो जाता है कि नामांकन के समय सरकारी कॉन्ट्रैक्ट जारी थे, तो यह कानून के तहत अयोग्यता का स्पष्ट मामला होगा और इससे सांसद की सदस्यता पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल, अब इस मामले में अगली सुनवाई का इंतजार है और सभी पक्षों के जवाब के बाद ही आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी। सरकारी ठेकेदार रहे हैं अनुराग बता दें कि अनुराग शर्मा PWD ठेकेदार रहे हैं। उन्होंने अपने नामांकन में 23.64 करोड़ के सरकारी ठेके भी दर्शाए है। इनमें से 12 करोड़ 58 लाख रुपए के दो काम 19 फरवरी 2026 को ही इनके नाम अवॉर्ड किए गए।