हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र शुरू हुए एक महीने से अधिक समय बीत गया है, लेकिन अब तक छठी से नौवीं कक्षा की सभी पाठ्य पुस्तकें छात्रों को नहीं मिल पाई। किताबों के बगैर बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं शिक्षक भी असमंजस की स्थिति में हैं। प्रदेश के विंटर क्लोजिंग स्कूलों में 12 फरवरी से कक्षाएं शुरू हो गई और 20 मार्च को भी सैकड़ों छात्र-छात्राएं किताबों के इंतजार में है। लगभग 36 दिन बाद भी किताबें न मिलना शिक्षा व्यवस्था और सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि, डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन ने फरवरी के पहले सप्ताह में एक ऑर्डर जारी किया, जिसमे कहा गया कि पहले ही दिन से स्कूलों में रेगुलर पढ़ाई शुरू होनी चाहिए। इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं होगी। इन आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए डिप्टी डायरेक्टर, ब्लॉक ऑफिसर इत्यादि को स्कूलों के औचक निरीक्षण के आदेश दिए गए। पहले दिन से पढ़ाई के फरमान तो दे दिए, किताबों पर ध्यान नहीं शिक्षा विभाग ने पहले दिन से पढ़ाई के सख्त फरमान तो सुना दिए, लेकिन सभी किताबें 20 मार्च को भी मुहैया नहीं कराई। हैरानी इस बात की कई ब्लॉक में छठीं से नौवी कक्षा की 10 से 11 किताबें अब तक स्कूलों में नहीं पहुंची। हालांकि, कुछ ब्लॉक में अब दो से तीन किताबें ही बची है। सराहां ब्लॉक में अभी भी 11 किताबों का इंतजार सिरमौर जिले के सराहां ब्लॉक के सरकारी स्कूलों में छठी से नौवी कक्षा की 11 किताबें अब तक बच्चों को नहीं मिली। इनमें छठी कक्षा की दो किताबें ,सातवीं, आठवीं तथा नौवीं कक्षा की तीन-तीन किताबें शामिल हैं। कई अन्य ब्लॉकों में भी 3 से 10 किताबें स्कूलों में नहीं पहुंच सकी। शिमला के स्कूलों में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। जिला के कई स्कूलों में अब तक आठवीं की भूगोल और नौवीं की साइंस की किताब उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में टीचर बिना किताबों के पढ़ाने को मजबूर हैं और छात्रों को भी पढ़ाई में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अंग्रेजी मीडियम के कारण पहले ही मुश्किल में टीचर बता दें कि राज्य सरकार ने साल 2025 से ही सभी सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी मीडिया शुरू किया है। इस वजह से कुछ टीचर पहले ही दबाव में हैं। अब किताबों की कमी ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है। शिक्षकों का कहना है कि बिना पुस्तकों के पढ़ाई करवाना बेहद कठिन हो रहा है। अभी टीचर है तो किताबें नहीं, आने वाले दिनों में नॉन टीचिंग ड्यूटी देनी होगी चिंता की बात यह है कि अभी स्कूलों में टीचर उपलब्ध है तो किताबें नहीं है और आने वाले समय में शिक्षकों की ड्यूटी वोटर लिस्ट तैयार करने, उसके विशेष पुनरीक्षण, चुनाव ड्यूटी और जनगणना जैसे कार्यों में लगनी है। इससे बच्चों की पढ़ाई पर और बुरा असर पड़ने की आशंका है। यह शंका खुद टीचर जाहिर कर रहे हैं। 25 मार्च तक सारी बुक्स प्रोवाइड करवा दी जाएगी: सेक्रेटरी प्रदेश में सरकारी स्कूलों में बच्चों को मुफ्त किताबें उपलब्ध करवाई जाती हैं, इनकी प्रिंटिंग हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला करता है। बोर्ड के सचिव डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया में कुछ दिक्कत आने के कारण देरी हुई है, जिसकी जानकारी सरकार को पहले ही दे दी गई थी। उन्होंने कहा कि करीब 90 फीसदी किताबें पहले ही उपलब्ध करवाई जा चुकी हैं और 25 मार्च तक सभी किताबें स्कूलों में पहुंचने की उम्मीद है।