हिमाचल प्रदेश में बैंक कर्मचारी और अधिकारी आज एक दिवसीय हड़ताल पर रहे। यह हड़ताल यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के देशव्यापी आह्वान पर की गई, जिसमें प्रदेश की 9 बैंक यूनियनों ने भाग लिया। हड़ताल का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र में भी अन्य सरकारी कार्यालयों की तरह पांच दिवसीय कार्य प्रणाली लागू करवाना है। हड़ताल के चलते प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं। इस देशव्यापी हड़ताल में देशभर से आठ लाख से अधिक बैंक कर्मचारी और अधिकारी शामिल हुए। हिमाचल के विभिन्न जिलों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ-साथ निजी बैंकों के कर्मचारियों ने भी इसमें हिस्सा लिया, जिसके कारण लेन-देन, कैश काउंटर और अन्य बैंकिंग कार्यों पर असर पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने कहा- LIC, RBI सहित सारे विभागों में पांच दिन काम है तो फिर बैंक कर्मचारियों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है। 10 साल से फाइव डेज वीक की मांग कर रहे हड़ताल के दौरान UFBU हिमाचल प्रदेश के संयोजक नरेंद्र शर्मा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस वर्ष 2015 से लगातार पांच दिवसीय बैंकिंग प्रणाली लागू करने की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह मांग वर्ष 2015 में हुए नौवें द्विपक्षीय समझौते के दौरान भी उठाई गई थी। उस समय केंद्र सरकार ने महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक बंद रखने का निर्णय लिया था, जबकि पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को पूरे दिन कार्य होता है। नरेंद्र शर्मा ने कोरोना काल का उल्लेख करते हुए कहा कि बैंक कर्मचारियों ने उस दौरान लगातार दो वर्षों तक सेवाएं दीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कर्मचारियों को केवल दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश मिलता है, जबकि अन्य शनिवार को पूरे दिन काम करना पड़ता है। बैंक कर्मचारी अब सप्ताह में केवल पांच दिन बैंकिंग कार्य की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, ताकि बेहतर कार्य-जीवन संतुलन सुनिश्चित हो सके। सरकार का ध्यान आकर्षित करने को हड़ताल नरेंद्र ने स्पष्ट किया कि यह हड़ताल किसी के विरोध में नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से की गई है। UFBU ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करेगी।

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