ISRO चीफ ने इस रॉकेट की तुलना भारत के पहले रॉकेट से की, जिसे डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने बनाया था। उन्होंने कहा, वह रॉकेट 17 टन का था, जो 35 किलो भार को अंतरिक्ष में ले जा सकता था। आज हम 75 टन भार ले जाने वाला रॉकेट बना रहे हैं, जिसकी ऊंचाई 40 मंजिला इमारत जितनी होगी। 

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