पुरातत्वविदों का मानना है कि यह मूर्ति ईसा पश्चात 11वीं या 12वीं शताब्दी की है। यह मूर्ति किसी मंदिर के गर्भगृह की शोभा रही होगी और संभावित रूप से मंदिर को नुकसान पहुंचाने के दौरान इसे नदी में फेंका गया होगा।Spread the love Post navigation UCC पर बोले मौलाना अरशद मदनी, ‘शरीयत के खिलाफ कोई भी कानून हमें मंजूर नहीं’ हिमाचल कैबिनेट मीटिंग के फैसले:विभिन्न विभागों में 44 पद भरने को मंजूरी; पेपर लीक मसले के समाधान पर कमेटी बनाई