तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा 12 जुलाई को लद्दाख पहुंच रहे हैं। उनके सचिव तेनजिन टकलहा ने इसकी पुष्टि की है। दलाई लामा एक महीने से अधिक समय तक लद्दाख में रहेंगे। दलाई लामा 6 जुलाई को धर्मशाला में अपना 90वां जन्मदिन मनाएंगे। उसके बाद उनके 9 जुलाई को धर्मशाला से प्रस्थान करने का प्रस्तावित कार्यक्रम है। लेह पहुंचने के बाद वे कुछ दिन आराम करेंगे। इस दौरान वे मौसम के अनुसार खुद को ढालेंगे। फिर वे धार्मिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होंगे। तिब्बती समुदाय स्वागत की तैयारी में जुटा जुलाई के अंत में दलाई लामा जांस्कर क्षेत्र का दौरा करेंगे। इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। सचिव तेनजिन टकलहा ने बताया कि दौरे से जुड़े समन्वय के लिए उनसे संपर्क किया जा सकता है। दलाई लामा के आने की खबर से लद्दाख में खुशी का माहौल है। तिब्बती समुदाय और स्थानीय प्रशासन स्वागत की तैयारियों में जुटे हैं। इस यात्रा के दौरान वे कई शिक्षाएं और प्रवचन भी देंगे। 2 जुलाई को पुनर्जन्म से जुड़ी घोषणा दलाई लामा 2 जुलाई को धर्मशाला में अपने पुनर्जन्म से जुड़ी महत्वपूर्ण घोषणा कर सकते हैं। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के अध्यक्ष सिक्योंग पेंपा त्सेरिंग ने यह जानकारी दी है। दलाई लामा 2 से 4 जुलाई तक धर्मशाला स्थित सीटीए मुख्यालय में रहेंगे। वहां वे साक्य, काग्यू, निंग्मा और गेलुग – चार प्रमुख बौद्ध परंपराओं के वरिष्ठ धर्मगुरुओं से मुलाकात करेंगे। 6 जुलाई को वे 90 वर्ष के हो जाएंगे। लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड और अरुणाचल के लोग दलाई लामा को आध्यात्मिक गुरु और मार्गदर्शक मानते हैं। इस घोषणा की प्रतीक्षा पूरा तिब्बती समुदाय और हिमालयी क्षेत्र के लाखों लोग कर रहे हैं। चीन इस मुद्दे पर विरोध जता चुका है। वह दलाई लामा के उत्तराधिकारी की नियुक्ति को नियंत्रित करना चाहता है। दलाई लामा ने स्पष्ट किया है कि उनका अगला पुनर्जन्म एक स्वतंत्र समाज में होगा। 2011 में छोड़ा राजनीतिक प्रमुख का पद मार्च 2011 में दलाई लामा ने निर्वासित तिब्बती सरकार के राजनीतिक प्रमुख का पद छोड़ दिया था। उन्होंने यह जिम्मेदारी लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सीटीए सरकार को सौंप दी थी। 2 जुलाई की घोषणा पर पूरे अंतरराष्ट्रीय बौद्ध समुदाय की नजरें टिकी हैं। पुनर्जन्म से जुड़ी कोई औपचारिक घोषणा तिब्बती इतिहास में नया अध्याय होगी।