ज्ञानवापी का मामला बहुत नाजुक है। ये सही है कि व्यास जी के तहखाने में 1993 तक पूजा होती थी। ये भी सही है कि कोर्ट ने उसी परंपरा को बहाल किया है। ये फैसला अदालत का है, ये किसी राजनीतिक दल या सरकार का फैसला नहीं है।Spread the love Post navigation परफ्यूम फैक्ट्री में लगी भीषण आग, 50 से अधिक लोग फंसे; मची चीख-पुकार हिमाचल में 4 मंत्रियों के नए पोर्टफोलियों:विक्रमादित्य सिंह को PWD के साथ शहरी विकास विभाग; राजेश धर्माणी को TCP हाउसिंग